झांसी। बुंदेलखंड की तपिश अब यहां के लिए वरदान साबित होने लगी है। इसका अंदाजा यहां एक के बाद एक लगाए जा रहे सोलर प्लांट को देखकर लगाया जा सकता है। यहां पांच प्लांटों से 360 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है। जबकि, 22 प्लांट और लगने जा रहे हैं। इसके लिए कंपनियों का सरकार से करार हो चुका है। जमीन चिह्नित करने का काम जारी है।
फरवरी के अंत से ही बुंदेलखंड में गर्मी जोर पकड़ने लगती है और सितंबर के आखिर तक गर्मी का सितम जारी रहता है। चिलचिलाती धूप के बीच लोगों के लिए एक-एक दिन गुजारना भारी पड़ जाता है। जाड़े के मौसम में भी यहां धूप खूब खिलती है, हालांकि, तब यह धूप लोगों को राहत पहुंचाती है। लेकिन, अब धूप की तपिश क्षेत्र के विकास में बड़ी भूमिका अदा करने जा रही है। सोलर एनर्जी के उत्पादन की दृष्टि से यहां की धूप और वातावरण को एकदम उपयुक्त पाया गया है। यही वजह है कि यहां अब तक पांच सोलर एनर्जी के प्लांट स्थापित हो चुके हैं। ईशारोज एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के प्लांट में 15 मेगावाट, फोर्थ पार्टनर कंपनी के प्लांट में 110 मेगावाट, सनसोर्स कंपनी के प्लांट में 135 मेगावाट, अडाणी ग्रुप की कंपनी के प्लांट में 50 मेगावाट व माहेश्वरी माइनिंग एंड एनर्जी लिमिटेड के प्लांट में 50 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है।
इसके अलावा 22 और कंपनियां यहां अपने सोलर पावर प्लांट स्थापित करने जा रही हैं। जो यहां 3000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करेंगी। इन सभी कंपनियों का सरकार से करार हो गया है। कंपनियों की ओर से प्लांटों की स्थापना के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया भी जारी है। मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र दिनेश सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में झांसी सोलर एनर्जी के उत्पादन के बड़े हब के रूप में उभरेगा।
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यहां सबसे अच्छा है धूप का रेडिएशन
उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी ने बताया कि झांसी में धूप का रेडिएशन देश में सबसे बेहतर है। हालांकि, यह स्थिति राजस्थान के कुछ इलाकों में भी है, परंतु वहां निरंतर धूल भरी आंधियां चलती रहती हैं, जिससे सोलर प्लेटों के रखरखाव पर ज्यादा ध्यान देना पड़ जाता है। जबकि, झांसी में यह स्थिति नहीं है। यही वजह है कि सोलर पावर प्लांट स्थापित करने के लिए यहां एक के बाद एक कंपनियां आगे आ रही हैं।
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ग्रामीणों से लीज पर ली जा रही है जमीन
सोलर पावर प्लांट स्थापित करने के लिए कंपनियों द्वारा ग्रामीणों से उनकी जमीन किराये पर ली जा रही है। इसके लिए कंपनियां किसानों से सीधे भी संपर्क कर लेती हैं। किसानों को उनकी जमीन का सालाना किराया प्रति एकड़ की दर से दिया जाता है। जमीन की उपयोगिता के आधार पर किराया 30 से 45 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष तक दिया जाता है।