अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पारीछा बांध पर अंग्रेजों के जमाने के लगे करीब डेढ़ सौ साल पुराने 318 गेट बदले जाएंगे। अभी यह गेट मैनुअल काम करते हैं। इस वजह से बांध के अंदर पानी स्टोर रख पाने में मुश्किल होती है। अब यह सभी गेट बदलकर नई तकनीक के मुताबिक लगाए जाएंगे। यह पूरा काम केन-बेतवा लिंक परियोजना के जरिए कराया जाएगा। इससे बांध की क्षमता में भी इजाफा होगा। अभियंताओं की टीम इसकी तैयारियों में जुटी है। इसका डीपीआर तैयार किया जा रहा है। अभियंताओं का कहना है इस बांध की सूरत बदलने में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
बुंदेलखंड में पारीछा बांध सबसे पुराना है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1855 में इस बांध के लिए सर्वे हुआ था। इसके बाद वर्ष 1857 में गदर के चलते मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 1875 में पारीछा गांव में यह बांध बनकर तैयार हुआ। पूरा बांध पत्थर, चूना एवं सुर्खी से बना है। बांध के अंदर पानी को रोकने के लिए 318 गेट लगाए गए हैं। पानी रोकने के लिए यह सभी गेट बारिश के बाद खड़े कर दिए जाते हैं। अभियंताओं के मुताबिक बांध का ढांचा अभी भी मजबूत है लेकिन, यह सभी गेेट मैनुअल तरीके से काम करने की वजह से उपयोगी नहीं रह गए हैं। सबसे बड़ी खामी यह है कि एक इंच पानी भी अधिक होने पर यह गेट गिर जाते हैं। इससे बांध में पानी बचाए रख पाना काफी मुश्किल होता है। तेज बहाव होने पर भी मैनुअल तरीके से गेट खड़े करने में समस्या आती है।
पारीछा बांध को केन-बेतवा लिंक परियोजना से जोड़ने के बाद इस बांध में सुधार कार्य कराए जाएंगे। इनमें सबसे पहला काम अंग्रेजों के जमाने के लगे यह गेट बदलने के साथ होगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अभियंताओं के मुताबिक अभी लगे 318 गेट की जगह यहां सिर्फ 118 गेट लगाए जाएंगे। यह सभी गेट रबड़ गेट होंगे। उड़ीसा के कई बांधों में इनका इस्तेमाल हुआ है। इससे बांध का संचालन आसानी से किया जा सकेगा। नहर भी आसानी से संचालित हो सकेगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार सचान के मुताबिक इस कार्य को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। कुछ दिनों के भीतर तकनीकी टीम भी यहां आएगी। बांध के पुर्ननिर्माण कार्य पर करीब सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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