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मनरेगा में कम हो गए 31 हजार मजदूर

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मनरेगा में कम हो गए 31 हजार मजदूर बारिश के चलते सिमट रहा काम, स्थाई रोजगार की ओर लौट रहे प्रवासी झांसी। मनरेगा मजदूरों की संख्या में अब गिरावट आ रही है। शुरूआती दौर के मुकाबले अब करीब 31 हजार मजदूर कम हो गए हैं। संभावना जताई जा रही कि तमाम जगहों से मजदूरों की वापसी शुरू हो जाने से इसमें कमी आ रही है। कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने के बाद वापस लौटे मजदूरों को मनरेगा के जरिए काम देना था। जनपद में अलग-अलग महकमों की ओर से कुल 957 कार्य तय हुए। कुल करीब 1418.07 लाख रुपये की लागत के कार्यों से 430462 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया। जुलाई माह के लिए 40.59 लाख कार्य स्वीकृत हुए। चार जुलाई तक 1.71 लाख मजदूर विभिन्न कार्यों में लगाए गए लेकिन, उसके बाद से संख्या में गिरावट आनी शुरू हो गई। आखिरी आकड़ों के मुताबिक जनपद में अब करीब 1.40 लाख मजदूर ही काम कर रहे हैं। इस तरह अब करीब 31 हजार मजदूर कम हो गए।बता दें, जनपद में कुल 1.09 लाख सक्रिय जॉबकॉर्ड धारक हैं। जानकारों के मुताबिक मऊरानीपुर, गरौठा, बबीना आदि इलाकों से रोजाना मजदूर अपने नियमित रोजगार वाले स्थानों की ओर जा रहे हैं। इस वजह से इनकी संख्या में कमी आ रही। बारिश की वजह भी मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्य धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं। इसके चलते भी मजदूर अब वापस अपने नियमित रोजगार की ओर लौटने को मजबूर हैं हालांकि अफसर इसे अभी नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि तकनीकी समस्याओं के चलते मनरेगाकर्मियों की संख्या अपडेट नहीं हो पा रही। सीडीओ निखिल टीकाराम फुंडे का कहना है कि मजदूरों की वापसी को लेकर सर्वे करने संबंधी कोई भी निर्देश अभी तक नहीं आया है। मनरेगा के ही जरिए रोजगार दिया जा रहा है।
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