कारागार परिसर के आसपास जैमर लगे होने के बावजूद मोबाइल फोन घनघनाते रहते हैं। जेल के भीतर तस्करी के माध्यम से अपराधियों तक नशीले पदार्थ के साथ मोबाइल फोन की भी आसान पहुंच है। वहीं, जेल अफसरों का कहना है कि जैमर अपडेट कराने में काफी मोटी रकम खर्च होगी।
ललितपुर जेल के अंदर बागपत के कुख्यात बदमाश ज्ञानेंद्र ढाका के पास से मिले पैड वाले मोबाइल फोन ने अंदरखाने की पोल खोलकर रख दी। जेल के भीतर से कई बदमाश मोबाइल फोन के सहारे अपना गिरोह चला रहे हैं। जेल के अंदर से ही रंगदारी वसूली की जा रही है। इन्हें रोक पाने में दशकों पुराने जैमर बेकार साबित हो रहे हैं।
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यही हालत झांसी जेल की भी है। यहां भी करीब दो दशक पहले मोबाइल जैमर लगवाए गए थे। यह जैमर सिर्फ 2 जी मोबाइल नेटवर्क को ही रोक पाने में सक्षम हैं, जबकि अब पूरा मोबाइल नेटवर्क 5जी पर काम करता है। 5जी के तेज नेटवर्क के सामने यह जैमर पूरी तरह फेल है।
खास बात यह कि नए नेटवर्क में हाईस्पीड के साथ डेटा भी ट्रांसफर होता है। इस वजह से जेल के भीतर से बड़े आराम से व्हाट्सएप कॉल भी हो सकती है। कारागार परिसर के आसपास जैमर लगे होने के बावजूद मोबाइल फोन घनघनाते रहते हैं। जेल के भीतर तस्करी के माध्यम से अपराधियों तक नशीले पदार्थ के साथ मोबाइल फोन की भी आसान पहुंच है। वहीं, जेल अफसरों का कहना है कि जैमर अपडेट कराने में काफी मोटी रकम खर्च होगी।
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जेल अफसरों का दावा है कि जेल के अंदर से मोबाइल अथवा कोई भी इलेक्ट्रानिक वस्तु आज तक बरामद नहीं हो सकी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक, जेल के भीतर आने-जाने वालों की कड़ाई से तलाशी कराई जाती है। शासन स्तर से ही जैमर अपडेट किए जा सकते हैं।