कई साल तक यह मामला फाइलों में दबा रहा। पिछले महीने सिंचाई विभाग में इसी तरह की गड़बड़ी उजागर होने पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता बीएल सिंह ने ऐसे सभी मृतक आश्रितों की पत्रावली तलब कर ली। जांच पड़ताल में पूरे सर्किल के अंदर कुल 29 बाबू पाए गए थे, जिन्होंने लंबी नौकरी के बाद भी टाइप टेस्ट पास नहीं किया।
लोक निर्माण विभाग में बड़ा गड़बड़झाला उजागर हुआ है। अनुकंपा आधार पर नौकरी पाने वाले कर्मचारी बिना टाइप टेस्ट पास किए पिछले दस साल से नौकरी कर रहे हैं। जांच-पड़ताल में 29 बाबू ऐसे पाए गए। नियमों के मुताबिक नौकरी आरंभ करने के दो साल के अंदर उनको यह परीक्षा पास करना जरूरी है। मामला उजागर होने सेे महकमे में हड़कंप है।
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मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत आश्रितों को नौकरी पर रखे जाने का प्रावधान है। आश्रितों की भर्ती सीधे लिपिक पद पर की जाती है। इस कोटे से नौकरी मिलने के दो साल के अंदर टाइप सीखना अनिवार्य होता है। इसके लिए प्रत्येक वर्ष टाइप टेस्ट कराने का नियम है। पहली बार परीक्षा में असफल होने पर ऐसे कर्मचारियों को दूसरा मौका दिया जाता है हालांकि इनकी वेतन वृद्धि रोक दी जाती है। दो साल बाद अगर टाइप टेस्ट पास नहीं कर पाते तब इनको नौकरी से हटा देने तक का प्रावधान है लेकिन, सांठगांठ के चलते इस कोटे में भर्ती कई कर्मचारियों का टाइप टेस्ट तक ही नहीं हुआ।
कई साल तक यह मामला फाइलों में दबा रहा। पिछले महीने सिंचाई विभाग में इसी तरह की गड़बड़ी उजागर होने पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता बीएल सिंह ने ऐसे सभी मृतक आश्रितों की पत्रावली तलब कर ली। जांच पड़ताल में पूरे सर्किल के अंदर कुल 29 बाबू पाए गए थे, जिन्होंने लंबी नौकरी के बाद भी टाइप टेस्ट पास नहीं किया। हैरानी की बात यह कि टाइप न आने के बावजूद भी पिछले दस साल से यह लिपिक बाबूगिरी कर रहे हैं। वहीं, समय पर परीक्षा न कराने पर संबंधित खंड के एक्सईएन पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
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इसमें पेंच यह भी फंसा हुआ है कि टाइप टेस्ट फेल होने वाले कर्मचारियों से पिछले दस साल के वेतन की रिकवरी कैसे की जा सकेगी। वहीं, अधीक्षण अभियंता आरएन गुप्ता का कहना है कि सभी खंडों को अपने स्तर पर टाइप टेस्ट कराने को कहा गया है। यह टेस्ट कराकर इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।