झांसी। सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने वालों के खिलाफ काफी समय की चुप्पी को तोड़ते हुए आखिरकार जेडीए का बुलडोजर बृहस्पतिवार को गरजा। जेडीए दस्ते ने कानपुर-ग्वालियर बाईपास पर कार्रवाई करते हुए अपनी 25 एकड़ जमीन अवैध कब्जे धारकों से खाली कराई। इस जमीन की बाजार में कीमत करीब 110 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष सर्वेश दीक्षित का कहना है खाली कराई जमीन का इस्तेमाल आवासीय इकाई विकसित करने में होगा।
सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने का फरमान मिलने के बाद प्राधिकरण प्रशासन आखिरकार एक्शन में आया। बृहस्पतिवार को खुद उपाध्यक्ष सर्वेश दीक्षित दस्ते को लेकर मौके पर पहुंच गए। बुलडोजर समेत भारी पुलिस बल देखकर वहां हड़कंप मच गया। कब्जेधारक हरिराम, रामरतन, मुरारी समेत आसपास के सैकड़ों लोग भी वहां पहुंच गए। इन लोगों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। अफसरों ने समझाने की कोशिश की लेकिन, यह लोग नहीं हटे। इसके बाद पुलिस बल की मदद से लोगों को हटाया गया। बुलडोजर एवं ट्रैक्टर की मदद से पूरी जमीन समतल की गई। करीब छह घंटे चली कार्रवाई के दौरान पूरी जमीन को उसे कटीले तारों से घेर दिया। कार्रवाई के दौरान सीओ सिटी प्रदीप सिंह, कोतवाली इंस्पेक्टर तुलसी राम पांडेय, सीपरी बाजार इंस्पेक्टर देवेश शुक्ला समेत भारी पुलिस बल एवं पीएसी जवान मौजूद रहे।
जमीन की कीमत करीब 110 करोड़ रुपये है। इस जमीन के खाली होने के बाद अब इसका इस्तेमाल प्राधिकरण आवासीय समेत अन्य उपयोग में कर सकेगा।
सर्वेश दीक्षित, उपाध्यक्ष, जेडीए
18 साल पहले की थी अधिग्रहीत
झांसी विकास प्राधिकरण ने यहां करीब सौ एकड़ जमीन वर्ष 2004 में अधिग्रहीत की थी। इसके एक हिस्से पर बेतवा विहार आवासीय योजना बनाई गई जबकि 25 एकड़ जमीन खाली पड़ी रह गई। इस जमीन को प्राधिकरण अफसर भी भूला बैठे। धीरे-धीरे पूरी जमीन पर अवैध कब्जे धारकों ने कब्जा जमा लिया और खेती समेत दूसरे काम करने लगे।