24 घंटे में गुजरीं 26 श्रमिक ट्रेनें
झांसी। झांसी रेलवे स्टेशन से होकर बृहस्पतिवार को सबसे अधिक 26 श्रमिक ट्रेनें गुजरीं। हर ट्रेन में 1100 से लेकर 1200 मजदूर व कामगार सवार रहते हैं। इनमें दिन के वक्त झांसी से गुजरीं छह गाड़ियों के मुसाफिरों को खाने के लिए वेज बिरयानी व एक लीटर पानी की बोतल दी गई।
लॉकडाउन के लगातार बढ़ने के कारण लाखों लोग अभी भी अपने घर से दूसरे शहरों में फंसे हैं। इन लोगों को घर पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों की आपसी सहमति के बाद एक मई से श्रमिक ट्रेनों का लगातार संचालन किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को झांसी रेलवे स्टेशन से 24 घंटे के अंतराल के दौरान सबसे अधिक 26 श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरीं। इनमें अहमदनगर से गोंडा, बांद्रा से गोंडा, रोहतक जंक्शन से टीकमगढ़, गोरखपुर से सिकंदराबाद, अंकेश्वर जंक्शन से वाराणसी जंक्शन, लोकमान्य तिलक से लखनऊ, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से बस्ती, सिंकदराबाद से लखनऊ, सिकंदराबाद से गोरखपुर, मिराज जंक्शन से गोरखपुर, पुणे से बस्ती, बड़ोदरा से गोरखपुर समेत अन्य स्टेशनों के बीच चलाईं गईं।
ट्रेन के आने पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। ट्रेन के आने से पूर्व ही प्लेटफार्म एक व दो को आरपीएफ व जीआरपी घेर लेती है। इस दौरान आरपीएफ, वाणिज्य, स्टेशन व जीआरपी के कर्मचारी मौजूद रहते हैं, ताकि कोई यात्री उतरकर कहीं न जा सके। ट्रेन को सैनिटाइज भी किया जाता है। चालक, सहचालक व गार्ड के बदलने के बाद गाड़ी गंतव्य के लिए रवाना हो जाती है। ट्रेन के जाने के बाद प्लेटफार्मों को सैनिटाइज किया जाता है।
प्लेटफार्म के नल बंद होने से मजदूर रहते हैं परेशान
रेलवे स्टेेशन पर श्रमिक एक्सप्रेस के रुकने के वक्त प्लेटफार्म पर लगे नल बंद रहते हैं। उस वक्त अगर किसी यात्री को पानी की जरूरत हो तो वो बेचैन होता रहता है। इस संबंध में डीआरएम संदीप माथुर ने बताया कि रनिंग स्टाफ के बदलते ही श्रमिक एक्सप्रेस को पांच मिनट में रवाना कर दिया जाता है। प्लेटफार्म पर यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं है। जिन- जिन स्टेशनों पर रनिंग स्टाफ बदलता है, उन स्टेशनों पर पानी व भोजन की व्यवस्था को बांट रखा गया है। जहां जरूरत होती है वहां पानी की बोतल व खाना उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर बच्चे को दूध की जरूरत है तो उस मांग को भी पूरा किया जाता है।