फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मार्च से मिलने लगेगा 22 गांवों के डेढ़ लाख लोगों को पाइपलाइन से पानी

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। रेलवे ने जलनिगम को रनगुवां ग्राम समूह पेयजल योजना के लिए दो क्रॉसिंग गेट के नीचे से पाइपलाइन डालने की अनुमति प्रदान कर दी है। अब मार्च तक इस योजना के पूरा होने पर 22 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोगों को पाइपलाइन से पानी मिलने लगेगा। इन गांवों को पारीछा बांध से पानी दिया जाएगा।
विज्ञापन

जलनिगम रनगुवां ग्राम समूह पेयजल योजना पर काम कर रहा है। दिसंबर तक इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया था। लेकिन पारीछा व गढ़मऊ रेलवे क्रॉसिंग के नीचे से पाइपलाइनों को ले जाना है। रेलवे से काम के लिए अनुमति न मिलने के कारण देरी होती जा रही थी। मगर, रेलवे ने अब इस काम के लिए अनुमति प्रदान कर दी है। जलनिगम ने अब मार्च तक योजना के सभी काम पूरे करने का लक्ष्य बनाया है।
रनगुवां ग्राम समूह पेयजल योजना 2014 में स्वीकृत हुई थी। इस योजना के लिए 65 करोड़ का बजट दिया गया है। योजना के तहत पारीछा बांध के निकट ट्रीटमेंट प्लांट, बांध के बीच में इनटेक वेल, पांच भूतल जलाशय, पांच पानी की टंकियां, 100 किलोमीटर पाइपलाइन डलना है। इस योजना से चिरगांव और बड़ागांव ब्लॉक के पारीछा खुर्द, मुराटा, पचार, अतपेई, बाऊरी, रनगुवां, विरगुवां, छपरा, गढ़मऊ, गांधीनगर, पहलगुवां, लेवा, पालर, पाली, परसर, ऊरैना, मड़ोरा, जौरी खुर्द, जौरी बुजुर्ग, काकोरी, बजेरा, धरमपुरा व रमैयारपुरा गांव लाभान्वित होंगे। इन गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए पारीछा बांध से प्रतिदिन नब्बे लाख लीटर (नौ एमएलडी) पानी लिया जाएगा।
विज्ञापन

- योजना के बड़े काम लगभग पूरे कर लिए गए हैं। 50 किलोमीटर पाइप लाइन भी डाल दी गई है। रेलवे ने भी दो क्रॉसिंग गेट के नीचे से पाइपलाइन निकालने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। मार्च तक संबंधित गांवों में पानी पहुंचने लगेगा। एके गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जलनिगम।
कई बार सवालों के घेरे में रही योजना
रनगुवां ग्राम समूह पेयजल योजना कई बार सवालों के घेरे में रही। दरअसल, इस योजना का काम एक की जगह कई ठेकेदारों से कराया जा रहा है। इस कारण टेंडर को लेकर कई बार आरोप प्रत्यारोप होते रहे। टेंडर प्रक्रिया को निरस्त भी करना पड़ा। यही कारण है कि यह योजना छह साल में भी पूरी नहीं हो सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें