झांसी। सरकारी खरीद केंद्रों में मूंगफली बेचने के बावजूद किसानों को एक माह बाद भी उपज का पैसा नहीं मिला जबकि 72 घंटे के भीतर भुगतान का दावा किया गया था। क्रय केंद्र बंद हुए भी एक माह से अधिक का समय गुजर चुका लेकिन, किसानों के खाते में पैसा नहीं आया। जनपद में 216 किसानों का करीब दो करोड़ रुपये फंसा हुआ है।
सरकारी क्रय केंद्रों में उपज बेचने के 72 घंटे के भीतर किसान के खाते में भुगतान भेजने का सरकार दावा करती है लेकिन, जमीनी हकीकत इसके ठीक उलटी है। झांसी में मूंगफली किसानों के खाते में उपज बेचने के एक माह बाद भी भुगतान नहीं हो रहा। जिन किसानों ने इन केंद्रों में उपज बेचा अब उनको भुगतान के लिए चक्कर काटना पड़ रहा।
बता दें, इस बार मूंगफली की फसल अच्छी हुई। सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया लेकिन, कुछ समय में ही मंडी में दाम एमएसपी से अधिक हो गए। इस नाते खरीद केंद्रों में मूंगफली की खरीद कम हुई। खरीद केंद्रों में करीब 5284.377 मीट्रिक टन खरीद हुई लेकिन, 216 किसानों का 2.05 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पा रहा। बताया जा रहा नैफेड और पीसीयू के बीच मूंगफली डिलीवरी के विवाद के चलते यह भुगतान फंसा हुआ है।
नैफेड को पीसीयू केंद्रों में हुई खरीद की पूरी डिलीवरी अभी तक नहीं मिली। इस वजह से इन किसानों को भुगतान नहीं हो रहा। वहीं, दोनों संस्थाओं के विवाद में किसान परेशान हो रहे हैं। भोजला केंद्र में उपज बेचने वाले श्यामेंद्र, रामनरेश, पंकज अहिरवार आदि का कहना है उन्होंने 20 जनवरी को उपज बेची। तीन दिन में भुगतान का भरोसा भी दिलाया गया लेकिन, कई चक्कर लगाने के बाद भी खाते में पैसा नहीं आया।
डिलीवरी न हो पाने से भुगतान अटका हुआ था। इस संबंध में पीसीयू को जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी बकाये का भुगतान पूरा करा दिया जाएगा।
उदयभानु सिंह उपायुक्त, सहकारिता