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कालोनियों में बाढ़ का खतरा,,,-City

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मूसलाधार बारिश बनी तीन हजार घरों के लिए ‘आफत’
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- आवास विकास के आसपास के इलाके होते हैं प्रभावित
- तेज बारिश में नाले का निकास पड़ जाता है छोटा
- डोंगरी बांध से छूटा पानी भी पहूज नदी का बढ़ा देता है जलस्तर
- दो सितंबर की सुबह हुए पानी के तांडव को नहीं भुला पा रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शिवपुरी रोड पर आवास विकास और उसके आसपास बसी छह कालोनियों में रहने वाले तीन हजार घरों के बाशिंदों के लिए दो सितंबर की सुबह का मंजर भुलाए नहीं भूल रहा है। मूसलाधार बारिश के दौरान उफनाए नाले और डोंगरी बांध से छूटे पानी ने इन घरों में बाढ़ जैसे हालात बना दिए थे। स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद पता चला कि यह हालात यहां से निकलने वाले नाले पर अतिक्रमण और पहूज नदी में गिरने से पहले पानी की निकासी का उचित इंतजाम न होने के कारण बने। इसमें डोंगरी बांध से छूटे पानी ने नाले के पानी को आगे नहीं बढ़ने दिया। इससे हालात और बिगड़ गए। फिलहाल, इस समस्या पर जिला प्रशासन और नगर निगम शांत है। वहीं, बारिश होते ही यहां के लोग सहम जाते हैं।
आवास विकास और उसके आसपास केकेपुरी, सैय्यद नगर, ताज कंपाउंड, संगम विहार, खातीबाबा, नंदनपुरा कालोनियां बसी हैं। इन कालोनियों से निकले नाले आगे जाकर पीलिया नाला में मिल जाते हैं। पीलिया नाले का पानी पहूज नदी में गिरने से पहले पास बनी नहर के नीचे से निकले तीन-तीन फीट के छह पाइपों से होकर गुजरता है। 25 साल पहले यह नाला 25 से 30 फीट चौड़ा था, मगर जैसे-जैसे भवनों का निर्माण होता गया, नाला छोटा हो गया। यह नाला अब छह फीट छोटा हो चुका है और जगह-जगह इस पर अतिक्रमण हो गया है। यही कारण है कि मूसलाधार बारिश में नाला उफना जाता है और पानी लोगों के घरों तक पहुंचना शुरू हो जाता है।
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दो सितंबर की सुबह भी यही हुआ। मूसलाधार बारिश में नाला उफना गया और पानी तेजी के साथ पहूच नदी में नहीं गिर सका। इधर, डोंगरी बांध से छूटा पानी गढ़िया डैम से होकर पहूज नदी में गिरा, जिससे नदी का भी जलस्तर बढ़ गया। नदी का जलस्तर बढ़ने से नाले का पानी आगे नहीं बढ़ सका। इससे पानी बैक मार गया, जो लोगों के घरों में भर गया। देखते ही देखते बाढ़ जैसे हालत बन गए।

पानी भरने के कारणों का हो रहा परीक्षण
नगर आयुक्त को नंदनपुरा क्षेत्र की कालोनियों में पानी भरने के कारणों का परीक्षण करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट आने के बाद जो कमी सामने आएंगी, उनको कार्ययोजना बनाकर दूर किया जाएगा। साथ ही जनपद के डोंगरी समेत सभी बांध सुरक्षित हैं। जलस्तर बढ़ने से पानी छोड़ा जा रहा है। नदियों के आसपास रहने वाले लोग सतर्कता से रहें।
- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी।

पुलिया बनाने की योजना
नहर की नीचे पाइपों की जगह पुलिया बनाने की योजना तैयार की जा रही है। इसकी अनुमति के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इस योजना पर काम शुरू होगा। साथ ही नाले के ऊपर के अतिक्रमण को चिह्नित कर हटाने की योजना है।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर।

अतिक्रमण पर ध्यान देते तो न बनते हालात
इन क्षेत्रों से पहले 25 से 30 फुट का नाला निकला हुआ था। दबंगों ने नाले तक की जमीन को या तो बेच दिया या अतिक्रमण कर रखा है। इससे आज नाला छह फीट का रह गया है। कुछ लोगों की वजह से सब परेशान हो रहे हैं। नाले से अतिक्रमण हटे, इसके लिए नगर निगम और लखनऊ स्तर पर संबंधित अफसरों को पत्र लिखा है।
- रवि शर्मा, विधायक।

पुलिया बन जाए तो दूर हो जाए समस्या
नाले का पानी पहूज नदी में पहुंचने से पहले पास में बनी नहर के नीचे से निकलता है। पानी को नहर के नीचे से निकालने के लिए तीन-तीन फुट के छह पाइप (साइफन) लगे हैं। नाला जब उफनाता है तो पाइपों के जरिए पानी तेजी से नहीं निकल पाता। इससे नाले का पानी घरों में घुसना शुरू हो जाता है। अगर, पाइपों की जगह पुलिया बन जाए तो समस्या दूर हो जाएगी।
- विद्या प्रकाश दुबे, क्षेत्रीय पार्षद।

बांध से पानी छोड़ना मजबूरी
जलस्तर बढ़ने पर बांध से पानी छोड़ना मजबूरी है। उस दिन बांध के आसपास 225 मिलीमीटर बारिश हुई थी, इस कारण आठ फीट पर गेट खोलने पड़े। अगर, दोबारा ऐसे हालात बने तो फिर से कालोनियों में पानी भरने की स्थिति बन सकती है। कालोनी बसाने से पहले नदी किनारे की समस्या को समझना चाहिए था। हालांकि, ऐसी स्थिति सालों बाद बनी है।
- मोहम्मद फरीद, अधिशासी अभियंता, डोंगरी बांध।


अगले साल नहीं भरेगा पानी
इस समस्या पर जिलाधिकारी, महापौर, विधायक और सभी संबंधित अफसरों ने आश्वस्त किया है कि अगले साल आवास विकास और आसपास की कालोनियों में बारिश का पानी नहीं भरेगा। गर्मियों तक हर हाल में नहर के नीचे पुलिया का निर्माण हो जाएगा, ताकि नाले का पानी तेजी के साथ निकल सके।

बारिश होते ही हो जाते हैं चिंतित
मेरा परिवार बारिश होते ही चिंतित हो जाता है। क्योंकि, दो सितंबर की सुबह का मंजर नहीं भूलता। कार में तक पानी भर गया था। बहुत नुकसान हुआ। गनीमत रही कि किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं हुआ।
- माजिद खान, सैय्यद नगर।

एक लाख का हो गया नुकसान
मैं कभी सोच नहीं सकता था कि मेरे घर में तीन फीट पानी भर जाएगा। कपड़े व अन्य सामान खराब हो गए। एक लाख से अधिक का नुकसान हो गया। जल्द इस समस्या का हल निकलना चाहिए।
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इरफान मोहम्मद, सैय्यद नगर।

पुलिया बनना ही हल
रात में जब बारिश होती है तो दहशत में सो तक नहीं पाते हैं। राजघाट नहर से निकले पाइपों की जगह वहां पुलिया बना दी जाए तो नाले का पानी सीधा जाने लगेगा। पुलिया बनना ही समस्या का हल है।
रामकुमार सिंह, संगम विहार।
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