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शहीद हसन-हुसैन ने दिया इंसानियत का पैगाम-Dehat

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शहीदों का जिक्र सुन नम हुई आंखें
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- संगोष्ठी में याद की गई कर्बला की शहादत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
शिया मोहल्ले के इमामबाड़े में हुई संगोष्ठी में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की चर्चा सुन श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। कर्बला की घटना को गमगीन माहौल में याद किया गया।
बुधवार को इस्लामिक कैलेंडर के प्रथम माह मुहर्रम की छह तारीख के मौके पर हुई संगोष्ठी में इंजीनियर हाजी काजिम रजा ने कहा कि इमाम हुसैन ने दुनिया को इंसानियत का पैगाम दिया है। उन्होंने अपना और अपने परिवार का बलिदान देकर अच्छाई को मिटने से बचाया था। पाप में डूबे कूफे के शासक यजीद को मुंह की खानी पड़ी थी। यजीद बुरा शासक था। अपने पिता की मृत्यु के बाद उसने कूफे की बागडोर संभाल ली। लेकिन, पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन ने उसका विरोध किया। यजीद यह जानता था कि इमाम हुसैन जनता में लोकप्रिय हैं। उन्हें साथ लिए बिना वह शासन नहीं कर सकता। इसलिए उसने उन्हें लालच दी और अपना शासन स्वीकार करने को कहा। इसके जवाब में इमाम हुसैन ने उससे कहा- मैं तेरी गुलामी स्वीकार नहीं कर सकता। इस पर यजीद ने जंग का एलान कर दिया। मुहर्रम की पहली तारीख से कर्बला में यह जंग शुरू हुई। 72 साथियों को साथ लेकर इमाम हुसैन, यजीद के खिलाफ मैदान में उतरे। जहां उन्होंने पड़ाव डाला, वहां से उन्हें पानी लेने पर यजीद ने रोक लगा दी। जंग में एक-एक कर उनके साथी शहीद हो गए। मुहर्रम की दसवीं तारीख को इमाम आखिरी सिपाही के रूप में मैदान में उतरे। इस दिन शुक्रवार का दिन था। दोपहर के समय उन्होंने जुमे की नमाज (शुक्रवार को होने वाली विशेष नमाज) की मोहलत मांगी। नमाज के दौरान वह सजदे में गए, ठीक तभी यजीद के सिपाही सिम्र ने उनका सिर धड़ से अलग कर दिया। इस तरह कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन शहीद हो गए।
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संगोष्ठी में शोएब आलम, अनवर नकी, हासिम रजा, साहिबे आलम, अख्तर हुसैन, अमीर हुसैन, रजा हुसैन, अबू तालिब आब्दी, जीशान, हैदर अली, सीम, लकी आदि मौजूद रहे।

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इमामबाड़ों में रखे ताजिये
झांसी। मोहर्रम की छठी तारीख बुधवार इमामबाड़ों में लाकर ताजिये रखे गए। ताजियेदारों ने मातमी धुन बजाई। वहीं, इमामबाड़ों पर रंगबिरंगी विद्युत सजावट कर की गई। रात में मातमी धुनों पर मुस्लिम समाज के लोग जियारत के लिए ताजिये इमामबाड़ों पर रखने के लिए ले गए। राई का ताजिया पर फातिहा पढ़ी गई। महानगर के इमामबाड़ों में बुर्राक सजाई जा रही है। इनमें रहीम की बुर्राक, हम्मालों की बुर्राक आदि शामिल है। रंगबिरंगी विद्युत झालरों से इमामबाड़ों को तेजी से सजाया रहा है।
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