आसान हुई तकनीकी और गैर तकनीकी शिक्षा की राह
झांसी। गैर तकनीकी और तकनीकी क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाने वाले छात्र-छात्राओं की राह आसान हुई है। शासन के नए आदेश के अनुसार अब प्रवेश के समय सभी अभ्यर्थियों का ऑनलाइन पंजीकरण संस्थागत ही नहीं बल्कि प्राइवेट आईटीआई को भी करना होगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के इलाकों की फीस में भी अंतर होगा। इससे संस्थाएं अभ्यर्थियों से मनमानी फीस नहीं वसूल सकेेंगी।
जनपद में पांच सरकारी संस्थान हैं। दो संस्थान राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, वर्ल्ड बैंक महिला शहरी क्षेत्र में हैं तथा बाकी की तीन संस्थान मऊरानीपुर, गरौठा और उल्दन में हैं। इन सभी सरकारी संस्थानों में प्रमुख आठ ट्रेड हैं, जिनमें फिटर, इलैक्ट्रीशियन, मशीनिस्ट, ड्राफ्टर मेकेनिकल, वेल्डर, प्लंबर, इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टर्नर सहित अन्य कई ट्रेड हैं तथा सभी ट्रेड में मेरिट के आधार पर प्रवेश मिलता है। हर साल तकनीकी क्षेत्र में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों की लंबी कतार होती है। इनमें कई को मौका मिल जाता है तो कई को निराशा हाथ लगती है।
इधर, प्राइवेट संस्थानों की बात करें तो जनपद में 39 प्राइवेट आईटीआई की संस्थाएं हैं, इन संस्थानों में प्रमुख चार ट्रेड हैं, जिसमें फिटर, इलैक्ट्रीशियन, कटिंग एंड स्वीइंग तथा सेनेटरी हैं। यह संस्थाएं विद्यार्थियों से कई गुना फीस वसूल कर तकनीकी ज्ञान दिया जाता है, लेकिन प्राइवेट संस्थानों की इस मनमानी पर इस साल से रोक लगा दी गई है। इस बार सरकारी संस्थानों की तरह ही प्राइवेट संस्थाओं में
प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रवेश के समय छात्र-छात्राओं का वेब पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा तथा फीस भी दर्ज करनी होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में गैर तकनीकी कोर्स के लिए 15 हजार तथा तकनीकी क्षेत्र में 17 हजार रुपये ही फीस के रूप में ली जाएगी। जबकि, शहर क्षेत्र में स्थित आईटीआई में तकनीकी कोर्स करने के लिए 18 हजार रुपये होगी। जबकि, इससे पूर्व यह व्यवस्था थी कि प्राईवेट संस्थानों में आईटीआई करने वाले छात्र-छात्राओं से 35-50 हजार कोर्स के लिए वसूल किए जाते थे।
अधिक वसूली पर होगी कार्रवाई
शासन के नए आदेश का पालन होगा। अधिक फीस वसूली की शिकायत स्वयं छात्र-छात्राओं को संयुक्त निदेशक से करनी होगी। शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - अरुण कुमार, प्रधानाचार्य आईटीआई