पथरीली जमीन पर कैसे तराशे खेल कॅरियर?
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पथरीले मैदान पर एथलेटिक्स खेलों को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि, कई बार बीयू प्रशासन से मैदान को संवारने के लिए बजट की मांग की गई, जो नहीं मिला। यही कारण है कि खिलाड़ी इंटर जोन ऑल इंडिया नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने से वंचित रह जा रहे हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में खिलाड़ियों के लिए बड़ा खेल मैदान है लेकिन उसको संवारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया गया। जबकि, बीयू प्रशासन चाहे तो आंतरिक बजट से खेल मैदान को खिलाड़ियों के उपयोग लायक बनाया जा सकता है। इस मैदान को हरा-भरा बनाने के लिए कई बार बीयू प्रशासन को अवगत कराया गया लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। यही कारण है कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के खिलाड़ी खेलों में बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। यदि मैदान को संवार दिया जाए तो खिलाड़ी खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए आगे आएंगे। ग्राउंड पर चारों ओर रैंप के साथ-साथ हॉकी, फुटबॉल, खो-खो, हैंडबॉल, एथलेटिक्स के लिए 400 मीटर का रनिंग ट्रैक और वॉलीबाल में खिलाड़ियों को तराशा जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर इंडोर गेम्स की बात करें तो बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन सुविधा है, लेकिन आउटडोर गेम्स को लेकर कोई सुविधा नहीं मिल रही है। जबकि, हर साल अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताएं होती हैं।
केवल बॉक्सिंग में मिले पदक
ऑल इंडिया नार्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स में बीयू के खिलाड़ी पांच साल से पदक हासिल नहीं कर सके। इसके पीछे का कारण खेल सुविधाओं और ट्रेनिंग का अभाव है। बॉक्सिंग के अलावा अन्य किसी खेल में खिलाड़ी पदक हासिल नहीं कर सके। बॉक्सिंग में 2011 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने श्रीकांत यादव और मोहम्मद इमरान ने पदक हासिल किया था। 2012 में इमरान ने दोबारा पदक हासिल कर बीयू की साख बचाई। 2013, 2014 में कोई पदक नहीं मिला। 2015 में अनुराधा ने पदक पाया। फिर 2016, 2017 और 2018 में कोई पदक प्राप्त नहीं हुआ। जबकि, हॉकी, फुटबॉल, खो-खो, हैंडबॉल, एथलेटिक्स और वॉलीबाल में एक भी खिलाड़ी जनपद का नाम रोशन नहीं कर सका।
कई बार मैदान को संवारने के लिए कुलपति से मांग की गई है। यहां तक की यूजीसी को भी पत्र भेजा गया लेकिन खिलाड़ियों के लिए ग्राउंड पर कोई सुविधा नहीं दी गई। यदि, ग्राउंड संवर जाए तो खिलाड़ी यूनिवर्सिटी खेलों में शानदार प्रदर्शन करने के काबिल बन सकेंगे। - सूरज पाल सिंह, क्रीड़ा अधिकारी (बीयू)