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साइकिल को राष्ट्रीय वाहन बनवाने, चले दस दीवाने
सब हेड: महाराष्ट्र के अकोला से साइकिल चलाकर यात्रियों का दल झांसी आया
क्रासर
दिल्ली में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलकर करेंगे मांग
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भारत को प्रदूषण मुक्त बनाने है तो साइकिल को राष्ट्रीय वाहन बनाना होगा। यह संदेश लेकर महाराष्ट्र के अकोला से दस साइकिल यात्रियों का दल दिल्ली जा रहा है। झांसी आए इस दल के सदस्यों ने अमर उजाला कार्यालय आकर बताया कि वे दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलेंगे और साइकिल को राष्ट्रीय वाहन बनाने की मांग करेंगे।
शिक्षक गजानन खेड़कर की अगुवाई में तिरंगा लेकर 21 जून से चली टीम में सात युवा सदस्य हैं, जबकि एक सदस्य रामभाव रोडे 66 वर्ष के हैं। करीब 950 किलोमीटर की दूरी तय कर बृहस्पतिवार को झांसी पहुंची टीम ने रानी लक्ष्मीबाई के किले को देखा और गुरुद्वारा सीपरी में डेरा डाला। अमर उजाला कार्यालय में आए गजानन खेंडकर ने बताया कि विष्णु देवा बहुउद्देश्यीय संस्था की ओर से शुरू हुई यात्रा के सदस्य अमरावती, वर्धा, नागपुर, इटारसी, भोपाल, ललितपुर होते हुए झांसी आए हैं। अभी तक की यात्रा में उन्हें कोई कटु अनुभव नहीं मिला, बल्कि हमारे लक्ष्य को जानकर अधिकांश लोग हर प्रकार से पूरा सहयोग दे रहे हैं। वह अभी तक छह हजार लोगों को संकल्प दिला चुके हैं कि साइकिल चलाएंगे। गजानन के अनुसार वह शहरी क्षेत्रों के बच्चोें व आम नागरिकों को विशेष जागरूक करते हैं, कि साइकिल चलाने से उन्हें कितना फायदा होगा। शरीर कितना फिट रहेगा।
उनके अनुसार टीम दो अगस्त को दिल्ली पहुंचेगी और दस अगस्त को प्रधानमंत्री कार्यालय में जाएगी। 11 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें लक्ष्य से अवगत कराएगी। 15 अगस्त को लाल किला में स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होकर लोगों को जागरूक करेंगे कि साइकिल चलाना क्यों जरूरी है, इसे क्यों राष्ट्रीय वाहन बनाया जाए। गजानन के मुताबिक उनके इस लक्ष्य में अकोला के पूर्व कलेक्टर श्रीकर परदेशी सहयोग कर रहे है, जो वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय में निदेशक हैं। टीम के सदस्य शुक्रवार को बजे डबरा के लिए रवाना हुए।
गुरुद्वारा में ठहरते है टीम के सदस्य
साइकिल यात्रियों के प्रमुख पड़ाव गुरुद्वारा होते हैं। गजानन के मुताबिक टीम 50 किलो मीटर के सफर के बाद रात में विश्राम लेती हैं। 32 पड़ाव स्थलों में 26 गुरुद्वारा हैं, जहां वह ठहरे है और ठहरेंगे। उनके इस यात्रा में गुरुद्वारों व रेडक्रास सोसायटी का प्रमुख योगदान हैं।
ये है टीम के सदस्य
गजानन खेंडकर, तरुण बानखडे, कृष्णा पवार, हर्षदीप बानखडे, गनेश पवार, दीपक शिंदे, निशांत पवार, नाना जगदाडे, गोपाल मुले, राम भाव रोडे हैं। इनमें हर्षदीप 17 वर्ष के, तो रामभाव 66 वर्ष के है।
साइकिल चलाने के फायदे
प्रदूषण पर नियंत्रण
पेट्रोल की बचत
शरीर का व्यायाम
पर्यावरण संरक्षण
साइकिल करती है बात विद्यार्थियों से
महाराष्ट्र माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की छठी कक्षा में मराठी की किताब में साइकिल म्हणते, मी आहे ना अध्याय विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता हैं। जो गजानन खेडकर ने नवाचार कार्यक्रम के अंतर्गत लिखी है, जिसे महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड ने स्वीकृत कर इसे 2017 के शैक्षणिक सत्र में शामिल किया। गजानन खेडकर के मुताबिक इस अध्याय में साइकिल विद्यार्थियों से बात कर बताती है कि मैं आपक ा शारीरिक व्यायाम कराती हूं समाज से बात करती है कि मै प्रदूषण कम कर आप सभी का स्वास्थ्य अच्छा रखती हूं, राष्ट्र से बात करती है, कि मैं पेट्रोल बचाकर राष्ट्रहित में काम करती हूं। इसलिए मेरा प्रयोग ज्यादा से ज्यादा किया जाए।