अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग 200 मरीज सामने आ रहे हैं। जबकि, नौ से 44 साल की उम्र में महिला को सिर्फ एक वैक्सीन लगवाकर इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं जागरूकता के अभाव में इस बीमारी का शिकार हो रही हैं।
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) की वजह से सर्वाइकल कैंसर होता है। मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी गौतम ने बताया कि महिलाएं शादी के पहले टीका लगवा लें तो इस बीमारी का खतरा कम हो जाता है। ये वैक्सीन नौ से 14 साल की उम्र में लगवा लें तो बेहतर रहेगा। मगर 44 साल तक महिलाएं इस वैक्सीन को लगवा सकती हैं। पहली बार वैक्सीन लगने के एक महीने बाद दूसरी और छठवें माह तीसरी डोज लगती है। उन्होंने बताया कि सर्वाइकल कैंसर के हर महीने 15 से 20 मरीज इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। साल भर में करीब 200 सर्वाइकल कैंसर के मरीज आते हैं। सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों की महिलाएं इसकी चपेट में आ रही हैं। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सर्वाइकल बायोप्सी की सुविधा है, इससे कैंसर है या नहीं, इसकी पुष्टि होती है। साथ ही शरीर के किस हिस्से में कितना कैंसर फैल चुका है, इसका पता सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जांच से करते हैं। शुरुआती स्टेज के मरीजों की सर्जरी हो जाती है।
40 से अधिक आयु की महिलाएं हर साल कराएं स्क्रीनिंग: डॉ. सुधा
मेडिकल कॉलेज के एसपीएम विभाग की सहायक आचार्य डॉ. सुधा शर्मा का कहना है कि देश में महिलाओं में ब्रेस्ट, ओरल कैंसर के बाद सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के केस सामने आते हैं। ऐसे में 40 से अधिक आयु की महिलाओं को साल में एक बार कैंसर की स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए।