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झांसी। कुदरत के कहर से परेशान किसानों पर सरकारें भी कुठाराघात करने से नहीं चूक रही हैं। किसानों की मदद को सरकार के नुमाइंदे भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से तबाह हुई फसल का एक साल भी बीस हजार किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
बुंदेलखंड की बदहाली के नाम पर राजनीति गरमाई हुई है। लोकसभा व विधानसभा में बुंदेलखंड के किसानों के नाम पर खूब आंसू बहाए जा रहे हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार के नुमाइंदे किसानों की मदद का जमकर दंभ भर रहे हैं। लेकिन, धरातल पर हालात इससे इतर हैं। इसका अंदाजा कुदरत की मार से बर्बाद हुई फसलों की राहत राशि के वितरण को देखकर लगाया जा सकता है। फरवरी 2015 में अतिवृष्टि व ओलावृष्टि ने जिले में भारी तबाही मचाई थी, जिससे रबी की फसल को काफी नुकसान हुआ था।
केंद्र व प्रदेश सरकार की टीमों ने क्षेत्र में सर्वे कर प्रभावित किसानों के लिए तीन अरब 56 करोड़ पचास लाख रुपये की धनराशि अनुमन्य की थी। जिले को अभी तक सिर्फ दो अरब 78 करोड़ 35 लाख रुपये ही उपलब्ध कराए गए हैं। जिले को शत-प्रतिशत राशि न मिल पाने की वजह से लगभग बीस हजार किसानों के खाते में राहत के नाम पर अब तक एक पाई भी नहीं पहुंची है। वहीं, इस रबी सीजन में जिला सूखे की चपेट में आ गया है, इससे प्रभावित किसानों के लिए 68 करोड़ रुपये की राहत राशि अनुमन्य की गई है, परंतु आवंटित सिर्फ सात करोड़ रुपये ही हुई है।
‘पूर्ण पारदर्शिता के साथ राहत राशि का वितरण जारी है। सभी किसानों को राहत राशि मिलेगी। इसके लिए जल्द ही और बजट का आवंटन होगा।’
- उमेश नारायण पांडेय, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)