झांसी। बुंदेलखंड के किसानों के पास अनार की खेती में एक बार निवेश कर 20 साल तक लाखों रुपये कमाने का बेतहरीन मौका है। इसके लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने बुंदेलखंड के लिए उपयुक्त 17 किस्में देश के अलग-अलग राज्यों से मंगवाई हैं, जो किसानों को मांग पर दी भी जा रही हैं।
अनार के पौधों को अगस्त या फिर फरवरी-मार्च में लगा सकते हैं। इसकी खेती के लिए यह समय उपयुक्त माना जाता है। सभी प्रकार की मिट्टी में इसकी खेती कर सकते हैं। किसानों को डेढ़ से दो साल बाद पेड़ फल देने लगता है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के फल विज्ञान विभाग के डॉ. रंजीन पॉल ने बताया कि किसान अनार की खेती से लाखों की कमाई कर सकते हैं। खास बात ये है कि इसके लिए ज्यादा लागत की जरूरत नहीं है। एक लाख रुपये की लागत से आठ से दस लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। इसका पौधा तीन-चार साल में पेड़ बन जाता है और फल देना शुरू कर देता है। अनार के एक पेड़ से लगभग 20 सालों तक फल मिल सकता है। उन्होंने बताया कि अनार की खेती गर्म प्रदेशों में होती है। भारत में अनार की खेती अधिकतर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात में होती है। ऐसे में इन राज्यों के किसान खेती कर बुंदेलखंड के बाजार को अनार उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय ने बुंदेलखंड के लिए उपयुक्त गनेश, जी-137, मृदुला, अर्कटा, भगवा, सुपर भगवा आदि फसल मंगवाई हैं।
ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं
अनार एक सूखी फसल है, इसलिए इसकी ज्यादा उपज पाने के लिए सिंचाई करना जरूरी माना जाता है। इसकी खेती अगर गर्मियों में कर रहे हैं तो लगभग 5 से 7 दिनों बाद सिंचाई कर देनी चाहिए। अगर सर्दियों का मौसम है तो लगभग 10 से 12 दिनों में सिंचाई कर देनी चाहिए। ध्यान रहे कि इसके पौधों के लिए बूंद-बूंद सिंचाई अच्छी मानी जाती है। अनार की खेती में पेड़ से फल तभी तोड़ना चाहिए, जब पूरे तरह पक जाएं। लगभग 120 से 130 दिनों बाद फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
इस समय रोपें पौधा
अनार की खेती कर रहे हैं तो पौधारोपण से लगभग एक महीने पहले गड्ढे खोद लें। ध्यान रहे कि ये गड्ढे लगभग 60-60 सेंटीमीटर लंबे, चौड़े और गहरे होने चाहिए। साथ ही इनकी सामान्यत: दूरी 3.5 से 4.5 मीटर की होनी चाहिए। अब गड्ढों को लगभग 15 दिनों तक खुला छोड़ दें। इसके बाद लगभग 20 किलो पकी हुई गोबर की खाद, एक किलो सिंगल सुपर फास्फेट, 0.50 ग्राम क्लोरो पायरीफास का चूर्ण तैयार कर इन सभी को गड्ढों की सतह से 15 सेंटीमीटर ऊंचाई तक भर दें। अच्छी देखभाल और उन्नत प्रबंधन अपनाने से एक पेड़ से लगभग 30-35 किलो फल मिल सकते हैं। पौधों के बीच की दूरी कम होनी चाहिए, जिससे पौधे लगाने से प्रति हेक्टेयर लगभग 190-200 क्विंटल तक फल मिल सकेगा।