झांसी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत निशुल्क सर्जरी कर बच्चों के जन्मजात विकार को दूर किया जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से ही झांसी, बुंदेलखंड सहित प्रदेश भर से आए 20 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। वहीं, कई बच्चे उपचाराधीन हैं। उनका भी जल्द ऑपरेशन कराया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज ने न सिर्फ झांसी बल्कि प्रदेश के जनपदों के बच्चे निशुल्क उपचार के लिए आ रहे हैं। बच्चों में जन्मजात दोष जैसे सिर का बड़ा होना, पीठ पर उभार, जन्मजात मोतियाबिंद, कान का बहना, पैरों का मुड़ा होना, शारीरिक विकास जैसी अव्यवस्थाओं की सर्जरी जनपद में ही कराई जाती है।
प्रदेश भर से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के बच्चों की सर्जरी मेडिकल कॉलेज में कराई जा रही है। इसके अलावा आरबीएसके के जरिए दिल में छेद, कानों में बहरापन, होंठ, तालू कटे होने जैसी समस्याओं की सर्जरी के लिए बाहरी जनपदों में इलाज मुहैया कराया जा रहा है। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर ने बताया कि लॉकडाउन खुलने के बाद से जनपद में चार न्यूरल ट्यूब से पीड़ित बच्चों की सर्जरी की जा चुकी है। पैर मुड़े नौ बच्चों का इलाज किया गया। साथ ही, छह बहरापन से ग्रसित बच्चों की जिले के बाहर सर्जरी कराई गई है।
यहां कर सकते संपर्क
आरबीएसके के अंतर्गत 39 अलग बीमारियों का निशुल्क इलाज किया जाता है। इसके लिए जिले की आरबीएसके टीम से संपर्क किया जा सकता है। हर ब्लॉक स्तर पर भी दो आरबीएसके टीम गठित है। सभी सर्जरी और उपचार निशुल्क की जा रही है। इसके व्यय का वहन एनएचएम द्वारा किया जा रहा है।
महिलाओं में फॉलिक एसिड की कमी से उनके गर्भ में पल रहे बच्चों को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट जैसी विसंगति से जूझना पड़ता है। इससे बच्चे की जान जाने का खतरा रहता है। ऐसी विसंगति से बच्चों को बचाने के लिए महिलाएं गर्भावस्था के समय आयरन फॉलिक एसिड की गोलियां जरूर लें। - डॉ. दिनेश राजपूत, न्यूरो सर्जन, मेडिकल कॉलेज।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक ही न्यूरो सर्जन है। जो ओपीडी भी देखते हैं और हर गुरुवार को सर्जरी भी करते हैं। कोविड के समय में कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल के लिए इनकी भी रोटेशनल ड्यूटी लगती है। इसके चलते कभी-कभी इंतजार करना पड़ता है। - डॉ. रामबाबू, डीईआईसी मैनेजर, आरबीएसके।