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दो साल में 25 फीसदी ही आयुष्मान कार्ड बने

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लेटलतीफी: दो साल में 25 फीसदी ही आयुष्मान कार्ड बने
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झांसी। झांसी में आयुष्मान कार्ड बनाने की रफ्तार सुस्त है। पिछले दो सालों में 5.90 लाख लाभार्थियों के सापेक्ष 25 फीसदी लोगों के ही गोल्डन कार्ड बन पाए हैं। गरीबों को इलाज में बड़ी राहत देने वाली इस योजना पर कोरोना ने भी ग्रहण लगाने का काम किया है।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना की शुरूआत देश में सितंबर 2018 को हुई थी। इसके बाद से लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड बनने शुरू हो गए थे। इसके तहत समाज के कमजोर वर्ग को लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा मिलती है। इसको प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी कहा जाता है। कार्ड धारक के बीमार होने पर साल भर में पांच लाख रुपये तक का खर्च सरकार उठाती है। फिर चाहें व्यक्ति सरकारी अस्पताल में भर्ती हो या प्राइवेट में। झांसी में 5.90 लाख के कार्ड बनने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष 1.45 लाख लाभार्थियों के कार्ड बन चुके हैं। जो कि लक्ष्य के सापेक्ष 25 फीसदी ही है। कोरोना काल में एक अप्रैल 2020 से जून 2021 तक 45 हजार आयुष्मान कार्ड बने हैं।
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कैसे हुआ नामों का चयन
आयुष्मान भारत योजना का लाभ गरीब, वंचित ग्रामीण, शहरी श्रमिक और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर शहरी परिवार इस योजना के पात्र हैं। 2011 में की गई सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना के अनुसार जिन व्यक्तियों के नाम गरीबी रेखा में हैं, वे खुद आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्र हैं।
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ऐसे बनवा सकते हैं
- फ्री हेल्पलाइन नंबर 180018004444 पर कॉल करें।
- नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल में आरोग्य मित्र से मिलें।
- नजदीकी जन सेवा केंद्र पर संपर्क करें।
- साथ में आधार, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर लेकर जाएं।
वर्जन..
गोल्डन कार्ड बनाने का काम तेजी से चल रहा है। कोरोना काल में ही 45 हजार आयुष्मान कार्ड बने हैं। आगे भी तेजी से अभियान चलाकर कार्ड बनवाए जाएंगे। - डॉ. महेंद्र कुमार, नोडल अधिकारी, पीएमजेएवाई।
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