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कोरोना से 192 बच्चों ने माता या पिता को खोया, चार हुए अनाथ

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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। हालात की भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस महामारी की चपेट में आकर जिले के 192 बच्चे अपने माता या पिता में से किसी एक को खो चुके हैं। जबकि, चार बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता - पिता दोनों को महामारी ने लील लिया है और वे अनाथ हो गए हैं। इनमें से 100 बच्चों की अनुदान राशि स्वीकृत की जा चुकी है, जबकि 92 बच्चों के संबंध में पड़ताल जारी है।
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कोरोना वायरस का संक्रमण इंसानियत पर कहर बनकर टूटा है। कई परिवारों के कमाऊ सदस्य की मौत की वजह से उनके आश्रितों के सामने जीवन यापन का संकट गहरा गया है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए प्रदेश सरकार की ओर से ‘उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ शुरू की गई है। इसके तहत एक मार्च 2020 के बाद से जो बच्चे अनाथ हुए हैं तथा जिन बच्चों ने माता-पिता में से किसी एक को खोया है, उन्हें 18 साल की आयु तक चार हजार रुपये प्रतिमाह अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए आवेदन जिला प्रोबेशन कार्यालय में करना होता है। यहां अब तक 196 बच्चों के आवेदन आ चुके हैं। इनमें 192 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता पिता में से किसी की एक की कोरोना से मौत हुई है। जबकि, चार बच्चों ने माता-पिता दोनों को खो दिया है। इनमें से 100 बच्चों की अनुदान राशि स्वीकृत की जा चुकी है। इन्हें तीन-तीन महीने की अनुदान राशि की किस्त उपलब्ध भी करा दी गई है। जबकि, 92 बच्चों के दस्तावेजों का सत्यापन जारी है।
17 बच्चे अन्य कारणों से हुए अनाथ
झांसी। उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ कोरोना से प्रभावित बच्चों के अलावा अन्य कारणों से अनाथ हुए बच्चों को भी दिया जा रहा है। जिले में अब तक ऐसे 17 बच्चे सामने आ चुके हैं, जिनके माता-पिता की मृत्यु अन्य कोई बीमारी या दुर्घटना में हुई है।
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इन अभिलेखों के साथ करें आवेदन
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- बच्चे और वर्तमान अभिभावक की फोटो
- बच्चे का आयु प्रमाण पत्र
- बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
- माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र
- प्रदेश के निवासी होने का घोषणा पत्र
- एकल माता या पिता के जीवित होने की स्थिति में आय प्रमाण पत्र (दोनों की मृत्यु होने पर जरूरी नहीं)
- इनमें से कोई एक पहचान पत्र पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पेंशनर फोटो आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक की पासबुक, पासपोर्ट
- कोविड - 19 से मृत्यु के साक्ष्य के तौर पर एंटीजन या आरटीपीसीआर की रिपोर्ट के अलावा ब्लड टेस्ट व सीटी स्कैन से भी पुष्टि मानी जाएगी। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी संबंधित लक्षणों से मौत हुई हो तो उसे भी इसी वर्ग में शामिल किया जाएगा।
उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 12 लाख रुपये की धनराशि 100 बच्चों को उपलब्ध कराई गई है। तीन माह की किस्त 12 हजार रुपये प्रत्येक बच्चे को दी गई है। शेष बच्चों का भी तेजी से सत्यापन किया जा रहा है।
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- नंदलाल सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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