रोजीरोटी के लिए लगती है मजदूरों की भीड़
ललितपुर। शहर के पुराने नगर भवन के पास का क्षेत्र मजदूरों का अड्डा बन गया है। यहां काम की तलाश में रोज पांच सौ से अधिक मजदूर आते हैं और काम का इंतजार करते हैं। कुछ को तो रोजगार मिल जाता है, बाकी दिन भर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। लोकसभा चुनाव में जनता इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों को घेर सकती है।
लोकसभा चुनाव में नेता वोट मांगने आएंगे। यह कई तरह के वायदे जनता से करेंगे। लेकिन, इसमें पुराने नगर भवन के पास रोज मजदूरी की तलाश में आने वाले लोगों की आवाज शायद ही कोई उठाए। क्योंकि, यहां मजदूरी की तलाश में रोज पांच सौ के आसपास लोग आते हैं। कुछ लोग पैदल, कुछ साइकिल तो कुछ बसों से किराया लगाकर आसपास के गांवों से आते हैं। साथ में रोटी बांधकर लाते हैं। इसमें से तीन सौ से साढ़े तीन सौ लोगों को तो रोजगार मिल जाता है, बाकी लोग मजदूरी के लिए इंतजार करके रह जाते हैं। इन दिनों काम कुछ मंदा चल रहा है। 15 दिन पहले तक तीन सौ रुपये रोज मिलते थे, लेकिन अब ढाई सौ रुपये मिल रहे हैं। ढाई सौ रुपये भी बड़ी आरजू-मिन्नत करने के बाद ही मिल पाते हैं। बृहस्पतिवार को नगर भवन के पास रोजगार के इंतजार में खड़े कई श्रमिकों ने अपनी पीड़ा को खुलकर सुनाया। वह मौजूदा व्यवस्था दुखी नजर आए।
मजदूरों को गर्मी व बरसात के सीजन में खड़े होने के लिए शेड, पीने के पानी और बैठक बनवाने का भरोसा नगर पालिका के तीन अध्यक्षों ने किए, लेकिन किसी ने भी इस वायदे को पूरा नहीं किया। अब मौजूदा पालिकाध्यक्ष से उम्मीद है। गर्मी की शुरुआत हो गई है। यदि शीघ्र समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होंगी।
- राकेश
महंगाई कम करने के लिए वादे तो किए जाते हैं, लेकिन इस पर अमल कोई नहीं करता। मौजूदा समय में ढाई सौ रुपये मजदूरी के मिल रहे हैं, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा है। श्रमिकों को तीन सौ रुपये से कम नहीं मिलना चाहिए, लेकिन किससे कहें। और कोई विकल्प भी नहीं है, जिस कारण जितना मिल रहा, उतने में ही काम कर रहे हैं।
- जितेंद्र
रोजगार के लिए बहुत मारामारी है। सुबह होते ही नगर भवन के पास श्रमिकों का मेला सा लग जाता है। यदि किसी को दो मजदूर की जरूरत है तो उसके सामने दस मजदूर खड़े हो जाते हैं। यह सिलसिला सुबह दस बजे तक चलता रहता है। इसके बाद तो कई श्रमिक मायूस हो जाते हैं। प्रतिदिन करीब पचास से सौ मजदूरों का काम नहीं मिल पाता है।
- रगवर
नगर भवन के पास रोजगार की आस में तीन सौ से चार सौ श्रमिक आते हैं। इसमें कइयों को काम मिलता है तो कई काम पाने से रह जाते हैं। यह हरेक मजदूर के साथ होता है। शायद ही ऐसा कोई मजदूर होगा, जिसे रोजाना काम मिलता हो। अनियमित मजदूरी मिलने से श्रमिकों को घर का गुजारा करना मुश्किल हो जाता है।
- अनेक सिंह
जिले में कोई फ्रैक्ट्री तो है नहीं कि वहां काम पर चले जाएं। जिस दिन काम नहीं मिलता है, उस दिन घर वापसी के लिए टैक्सी के किराए का इंतजाम करना मुश्किल हो जाता है। यदि उस दिन घर के लिए कोई सामग्री ले जानी हो तो फिर दुकान पर उधार करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है।
- रामदयाल
श्रमिकों को पृथक से अन्य कोई स्थल या छांव की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। जहां तक पेयजल की बात है तो नगर पालिका इसे शीर्ष प्राथमिकता में लिए हुए है। आने वाले दिनों में प्याऊ के माध्यम से श्रमिकों की इस समस्या का निदान किया जाएगा।
- डॉ. संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद