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सैक्स रैकेट कांड : आठ दोषियों को सजा, पांच बरी, 19 लाख से ज्यादा का लगा अर्थदंड

Fri, 01 Feb 2019 02:06 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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प्रतीकात्मक चित्र - फोटो : PTI
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डेढ़ साल पहले शहर के चर्चित सैक्स रैकेट कांड के मामले में अपर जिला एवं सत्र/विशेष न्यायाधीश (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने रैकेट संचालिका को आजीवन कारावास, एक पुलिस कर्मी समेत तीन अभियुक्तों को अलग-अलग धाराओं के अनुसार कुल साठ-साठ वर्ष का कारावास, तीन अभियुक्तों को कुल तीस-तीस वर्ष का कारावास का कठोर कारावास एवं एक अभियुक्त को दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं सभी अभियुक्तों पर कुल उन्नीस लाख छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक को अलग-अलग सजा भी भुगतना होगी।
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प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव एवं सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि डेढ़ वर्ष पूर्व थाना कोतवाली अंतर्गत एक मुहल्ला निवासी व्यक्ति ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसकी नाबालिग पुत्री को घंटाघर के पास शादीलाल कॉम्प्लैक्स के पीछे गली में चिंचू महाराज के मकान में माही उर्फ छाया सिंह परमार (21) जो इस मकान में देह व्यापार का धंधा संचालित करती है। रैकेट में पंद्रह से 24 साल तक की लड़कियां शामिल हैं।

इसी क्रम में उसकी नाबालिग पुत्री को आमिर पठान, आलोक द्विवेदी (जो पुलिस विभाग में एसओजी में तैनात थे), राहुल नायक उर्फ राही जैन, गजेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह बुंदेला (प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत अंधियारी ब्लॉक जखौरा), कल्यान, राज चौहान, देवेंद्र पटेल, महाराज पिसनारी, यश गुप्ता(कालपी, हाल निवासी ललितपुर, जो बजाज प्लांट में कार्ररत है), एक 65 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति, जो पीड़िता को स्वयं जाकर घटना स्थल एवं अज्ञात व्यक्तियों की पहचान कर सकती है।
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उक्त लोगों ने लगातार ढाई माह तक दुष्कर्म किया। सबसे पहले उसकी पुत्री फरवरी माह में साढ़े चार बजे शाम प्रधान डाकघर के सामने वाली गली में प्रिंसी पैथौलॉजी के पास मोबाइल सुधरवाने गई थी, जहां पर माही सिंह से उसकी पुत्री की मुलाकात हुई थी। उसने पुत्री को नौकरी का लालच देकर मोबाइल नंबर ले लिया। एक दिन उक्त माही उसकी पुत्री को घर से पार्टी की बात कहकर ले गई और अपने किराए के मकान में ले जाकर उसको चाय पिलाई, जिसके पीते हुए पुत्री को सिर में दर्द होने लगा। वहां राज चौहान आ गया और पीड़िता की कनपटी पर पिस्टल लगाकर दुष्कर्म किया और माही ने अश्लील वीडियो बना ली।

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ वहां राज चौहान ने कई बार दुष्कर्म किया। इसकेे बाद पीड़िता का ढाई माह तक दुष्कर्म किया गया। तीन मई 2017 को उसकी पुत्री को माही ने फोन कर जरूरी काम के बहाने बुला लिया और उसकी पुत्री उस दिन घर नहीं। इसके बाद चार मई 2017 को पुलिस में पुत्री की गुमशुदगी का प्रार्थना पत्र दिया गया। खोजबीन करने पर बीना रेलवे स्टेशन पर उसकी पुत्री मिल गई। तब पीड़िता द्वारा बताया गया कि उसे धमकाकर देवेंद्र पटेल आजादपुरा स्थित एक कमरे में ले गया था, जहां उसका दोस्त राहुल नायक उर्फ राही जैन झांसी में एक गोदाम में ले गया। जहां ललितपुर का गजेंद्र सिंह भी पहुंचा और उसे अज्ञात स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया।

इसके बाद उन्होंने उसे चर्च के पास डैम रोड पर छोड़ दिया। इसके बाद वह रेलवे स्टेशन से रेलगाड़ी से भोपाल पहुंची। जहां वह धर्मेंद्र धाकड़ एवं दानिश खान के साथ एक-एक दिन व रात अलग-अलग मकानों पर रही और चौथे दिन वह झेलम एक्सप्रेस से बीना पहुंची।
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इस मामले में पुलिस ने माही उर्फ छाया सिंह परमार, आमिर पठान, आलोक द्विवेदी, राहुल नायक, गजेंद्र सिंह लोधी, हरेंद्र सिंह बुंदेला, कल्यान सिंह, राज चौहान, देवेंद्र पटेल, महाराज पिसनारी, सर्वेश कुमार उर्फ यश गुप्ता व अज्ञात के खिलाफ धारा 376डी, 342, 120बी, 3/4 लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम व धारा 3, 5, 6 अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की, जिसमें महाराज पिसनारी उर्फ राजकुमार दुबे निवासी आजादपुरा और देवेंद्र कुमार शुक्ला का नाम प्रकाश में आया। न्यायालय में अभियुक्त माही पर धारा 3, 5, 6 अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, व धारा 4/16 च 6/16 पास्को एक्ट, देवेंद्र शुक्ला पर धारा 3 अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम व 6/16 पास्को एक्ट एवं राज चौहान पर 376 (2)(झ) एवं 6 पास्को एक्ट एवं अन्य अभियुक्त पर 376 (2)(झ) एवं 6 पास्को एक्ट के अपराध में आरोप पत्र विरचित किए गए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।

बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने उक्त मामले में अभियुक्त राज चौहान, आमिर पठान और गजेंद्र सिंह को धारा 376 (2)(झ) एवं धारा 4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम में दोषी पाते हुए 15-15 सालों की सजा सुनाई है, यह सजाएं अलग-अलग चलेंगी। इस आधार पर आरोपियों को तीस-तीस वर्ष के कठोर कारावास एवं दो-दो लाख रुपए का अर्थदंड भुगतना होगा। वहीं अभियुक्त आलोक द्विवेदी, हरेंद्र सिंह बुंदेला एवं कल्यान को उक्त धाराओं के अपराधों में ही दोषी पाते हुए तीस-तीस साल की सजा सुनाई है, जो अलग अलग भुगतनी होंगी।

इस तरह आरोपियों को कुल साठ-साठ वर्ष की सजा और चार-चार लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि सैक्स रैकेट संचालिका माही उर्फ छाया सिंह परमार को आजीवन कारावास एवं एक लाख चार हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं अभियुक्त देवेंद्र कुमार शुक्ला को धारा 3 अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम में दोषी पाते हुए दो वर्ष का साधारण कारावास व दो हजार रुपए अर्थदंड की सुनाई। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि वसूल होने पर पीड़िता को 50 फीसदी प्रतिकर दिलाने के आदेश भी दिए। साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए प्रतिकर प्रदान किए जाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को न्यायालय ने संस्तुति भी की।

एसपी को दिए अग्रिम विवेचना के आदेश
ललितपुर। सैक्स रैकेट कांड में न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उक्त मामले में विवेचकों द्वारा पूर्णरुप से विवेचना नहीं की गई है, जबकि सैक्स रैकेट के संचालन में इस्तेमाल हुए पीड़िता व अभियुक्त माही के मोबाइल नंबर की कॉल डिलेल्स के आधार पर और भी तथ्य प्रकाश में आ सकते थे और अन्य पीड़िताएं एवं समाज में छिपे नकाबपोश भेड़िए भी सामने आ सकते थे। विवेचक द्वारा कोई फर्द बरामदगी दर्ज नहीं की गई और वे मोबाइल कहां हैं, इसे देखा जाना आवश्यक है। न्यायालय ने माता पिता की भूमिका से साक्ष्य संकलित करने और पीड़िता का फर्जी आधार काड्र बनाए जाने का बिंदु भी संकलित होना था। न्यायालय ने इस मामले में विवेचना में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हएु कॉल डिटेल्स आदि के डाटा प्राप्त कर इसके मामले की अग्रिम विवेचना के आदेश पुलिस अधीक्षक को दिए।
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