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जलसंस्थान भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जीएम समेत 35 अफसर व कर्मचारी फंसे

Sat, 12 Jan 2019 01:14 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जलसंस्थान में व्याप्त 508 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की जांच में विजिलेंस को 41.95 करोड़ का घोटाला मिला है, जिसका हिसाब विभाग के पास नहीं है। इस घोटाले में पूर्व महाप्रबंधक, अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता, सहायक अभियंता, सचिव समेत 35 अधिकारी और कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी (संलिप्त) पाए गए हैं। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। इसमें सामग्री आपूर्ति करने वाली चार फर्मों के नाम भी शामिल हैं।
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जलसंस्थान में एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2017 तक के भुगतानों में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) कर रहा है। जलसंस्थान महाप्रबंधक ने विजिलेंस को सवा लाख पन्नों का जो रिकार्ड उपलब्ध कराया है, उस हिसाब से शासन ने उक्त अवधि में 508 करोड़ रुपये का बजट दिया। इसमें 126 करोड़ सामग्री आपूर्ति और 173 करोड़ का मरम्मत (स्टीमेट) काम किया गया।

बाकी बजट वेतन, पेंशन और अन्य भुगतानों पर खर्च किया गया। विजिलेंस ने 299 करोड़ की जांच के बाद जो निचोड़ निकाला है, उसमें 41.95 करोड़ की वित्तीय अनियमितता प्रथम दृष्टया साबित हुई। इसमें 35 अधिकारी और कर्मचारी फंस गए हैं। चार बड़ी फर्मों के नाम भी हैं। विजिलेंस निरीक्षक आरके सिंह ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी गई है।
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ये पाए गए संलिप्त

इस मामले में सेवानिवृत्त तत्कालीन महाप्रबंधक इंद्रदेव पांडे, तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र, अवर अभियंता डीपी राय, संघभूषण, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह चौधरी, धर्मपाल सिंह, सेवानिवृत्त अवर अभियंता विजय बहादुर सिंह, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता इंद्रपाल सिंह, सेवानिवृत्त वित्त प्रबंधक विलोक कुमार चौबे, सेवानिवृत्त लेखाकार ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता सीताराम साहू, सेवानिवृत्त सचिव अनिल कुमार जायसवाल, सचिव हरिश्चंद्र वाल्मीकि, अधिशासी अभियंता पीएन सिंह यादव, महाप्रबंधक रतनलाल, सेवानिवृत्त महाप्रबंधक रामपूजन वर्मा, सचिव आरएस कनौजिया, महाप्रबंधक वीएन द्विवेदी, अधिशासी अभियंता राधेश्याम यादव, सचिव रघुवेंद्र कुमार, अवर अभियंता प्रवीण कुमार, सेवानिवृत्त स्टोर कीपर श्रीधर शर्मा, स्टोर प्रभारी मोहम्मद रफीक, सेवानिवृत्त लेखाकार शिखर चंद्र जैन, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी विनोद चंद्र पाराशर, मंडल कैशियर मनीष कुमार अग्रवाल, अधिशासी अभियंता मनोज कुमार आर्या, वीके पांडे, आरएस सक्सेना, सहायक अभियंता राकेश कुमार निरंजन, वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, आडीटर मोहम्मद शफीक, लेखाकार श्याम बाबू को प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।

बचाव में पहुंचे हाईकोर्ट
इस वित्तीय अनियमितता की जांच में फंसे 13 अधिकारी और कर्मचारियों ने अपने बचाव के लिए हाईकोर्ट (उच्च न्यायालय) में याचिका दाखिल कर दी है। इसमें आठ सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं।
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