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मकर संक्रांति को लेकर घरों में उत्साह, बनने लगे पकवान

Fri, 11 Jan 2019 02:16 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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Makar Sankranti
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मकर संक्रांति पर्व को लेकर सभी समाजों में विशेष उत्साह है। लोग अपने - अपने तरीके से इस महापर्व को मनाएंगे। बुंदेलखंड के लोक जीवन में इस पर्व की शान जहां तिल, लाई के लड्डू और शक्कर से बने घड़िया घुल्ला है, वहीं महाराष्ट्र समाज में बुजुर्गों द्वारा बच्चों को तिल गुड़ की बर्फी देने की खास परंपरा है। बंगाली समाज में पर्व पर पीठे बनाये जा रहे हैं।
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वैदिक काल के इस पर्व को कई जगह 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि अधिकांश जगह यह पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। ज्योतिषविदों का कहना है कि 14 जनवरी की मध्य रात 1 बजकर 20 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। जिसके बाद स्नान का पर्व मकर संक्रांति मनाया जाएगा। हालांकि पर्व को लेकर सभी समाज व वर्गों में व्यापक उत्साह है। घरों में लाई, तिल, चना की दाल के लड्डू आदि बन रहे हैं। इसके अलावा बंगाली, महाराष्ट्रीय सहित अन्य समाजों में भी विभिन्न परंपरागत पकवान तैयार होंगे।

तिल गुड़ खाइए और मीठे वचन बोलिए
महाराष्ट्र समाज में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मंगल स्नान के बाद महिलाएं मिट्टी के छोटे - छोटे बर्तन में मौसमी सब्जियां, तिल के लड्डू रखेंगी। जिसे सजा कर पहले भगवान को अर्पण करेंगी। इसके बाद यह सुहागिन महिलाओं को 5, 7 व 13 की संख्या में देंगी। समाज के पुरोहित उज्ज्वल देवधर के अनुसार यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन गुड़ व तिल की रोटी तथा तिल की बर्फी बनती है। समाज के बुजुर्ग अपने से छोटों को यह बर्फी देते हैं और कहते है कि आप तिल गुड खाइए और मीठे वचन बोलिए। वहीं, महिलाएं मकर संक्रांति से लेकर रथ सप्तमी तक एक दूसरे को हल्दी कुमकुम लगाती हैं।
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बनती है घर- घर मूंग दाल की मंगौड़ी और भजिया
बुंदेलखंड में मकर संक्रांति पर्व का महत्वपूर्ण स्थान है। पर्व से ठीक एक दिन पहले सभी घरों में मूंग दाल की मंगौड़ी, भजिया पकवान बनाए जाते हैं। इसके बाद पर्व पर जलाशयों में स्नान करते हैं। पर्व की शान खिचड़ी बनाई जाती है। वहीं, शक्कर के घड़िया घुल्ला, मूंग की दाल के लड्डू भी उपयोग में लाये जाते हैं। बच्चों को मिट्टी व पीतल से बने पहिया लगे हाथी और घोडे़ दिए जाते हैं। वहीं, गांवों में लमटेरा गीत गाए जाते हैं। मान्यता है कि मकर राशि में सूर्य के प्रवेश के बाद दिन धीरे- धीरे बढ़ने लगते हैं। इसलिए बुंदेली कहावत है माघ तिला, तिल बाडे, फगुना गौडे पसारे चैत्य कडोरा पारे, बैसाख बैठका डारे।

पीठे व पाटी सपता है खास पकवान
बंगाली समाज में मकर संक्रांति का पर्व 15 व 16 को मनाया जाएगा, जिसे पौष पर्वन भी कहते हैं। बांधव समिति शहर के सदस्य रविशंकर चटर्जी के मुताबिक पर्व पर शकरकंदी से मिठाइयां बनती हैं, जिसे पीठे कहते हैं। इसके अलावा नारियल, मावा, खजूर के गुड़ तथा मैदा से सोरू चकली, पाटी सपता सहित कई पकवान बनाए जाते हैं। यह मिठाइयां एक सप्ताह पहले से बनना शुरू हो जाती हैं। उनके अनुसार समाज के सभी सदस्य जलाशयों में पर्व पर स्नान के लिए जाते हैं। हालांकि, बंगालियों में कलकत्ता के गंगासागर में स्नान करने का विशेष महत्व है और सूर्य की आराधना की जाती है।
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