मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार को बॉर्डर बैठक हुई, जिसमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पुलिस अफसरों ने हिस्सा लिया। बैठक में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव संपन्न कराने के लिए दोनों प्रदेश के पुलिस अफसरों के बीच सहमति बनी। इस दौरान सक्रिय बदमाशों की सूचियों का आदान-प्रदान हुआ।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में हुई बैठक में 28 नवंबर को मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में कानून व्यवस्था स्थिति दुरुस्त रखने के लिए योजनाएं बनाई गईं। बैठक में तय हुआ कि फर्जी सिमें चुनाव में व्यवधान पैदा कर सकती हैं, ऐसे में पुलिस महानिरीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि फर्जी सिमाें की खरीद पर नजर रखने के लिए एसटीएफ को लगाया गया है।
बैठक में तय हुआ कि बॉर्डर के सीमावर्ती थानों की पुलिस संयुक्त गश्त करेगी। बॉर्डर थानों से लेकर अधिकारियों का वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया है, जिसमें सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान होता रहेगा। जिसमें सक्रिय बदमाशों की सारी जानकारी व गतिविधियां एक दूसरे को भेजने का काम भी शुरू कर दिया गया है, ताकि एक दूसरे राज्यों के बदमाशों की पूरी कुंडली सामने रहे।
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बताया गया कि चुनाव से 48 घंटे पहले बॉर्डर थानों की सभी सीमाएं सील कर दी जाएंगी तथा मध्य प्रदेश के 117 प्वाइंटों पर भी सख्ती रहेगी। कड़ी चौकसी व चेकिंग बाद ही लोग निकल सकेंगे। प्रदेश के बारह जिलों को अलर्ट कर दिया गया है, जो संयुक्त गश्त कर एक दूसरे की मदद करते रहेंगे। 48 घंटे पहले शराब की सभी दुकानें भी बंद रहेगीं। बॉर्डर थानों से तीन किलोमीटर के दायरे पर चौकन्नी नजर रहेगी। रात के समय भी संयुक्त पेट्रोलिंग दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर करेगी। उप्र से 11,900 होमगार्डों को मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों पर ड्यूटी के लिए भेजा गया है।
छोटी-छोटी घटनाओं पर भी रहेगी नजर
चुनाव के दौरान व परिणाम आने के बाद सांप्रदायिक व जातिगत हिंसा पर भी दोनों राज्यों की पुलिस की नजर रखी रहेगी। साथ ही ऐसे मामले सामने आने पर तुरंत कारवाई की जाएगी। छोटी-छोटी घटनाओं को भी अधिकारी तुरंत संज्ञान में लेंगे।
सोशल मीडिया की होगी निगरानी
चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा अफवाह सोशल मीडिया से फैलती है। जिस पर लगाम लगाने के लिए नजर रखी जा रही है। जो भी अफवाह से लेकर खुराफाती मेसेज को साझा करेगा, उस पर पुलिस कड़ी कार्रवाई कर जेल भेजेगी।
इस पर रहा फोकस
- अपराधी तक पहुंचने के लिए सीमावर्ती जिलों की पुलिस की मदद से बेहतर प्लानिंग होगी।
- अपराधी को पकड़ना, अवैध हथियार, मादक पदार्थ तस्करों को रोकनेे के लिए संयुक्त ऑपरेशन होगा।
- कानून व्यवस्था बिगड़ने पर सीमावर्ती जिलों की मदद ली जाएगी।
- अपराध, अपराधियों, तरीका वारदात, फोटो की जानकारी और मुखबिर तंत्र से मिलने वाली सूचनाओं का आदान-प्रदान होगा।
- अपराध पर नियंत्रण के लिए सीमावर्ती जिलों, थानों की पुलिस से बेहतर समन्वय होगा।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
- जितने भी ऐसे थाने हैं, जहां दूसरे राज्यों के जिलों की सीमा लगती है। वहां दोनों जिलों के सीमावर्ती थाने में एक-एक पुलिस पार्टी संयुक्त गश्त करेगी। हर सप्ताह में बैठक होगी
- हर जिले का एक नोडल ऑफिसर बनाया जाएगा। नोडल ऑफिसर की आपस में समन्वय बनाने की जिम्मेदारी रहेगी।
- बैठक में बदमाशों की सूची, फोटो और अन्य जानकारी एक दूसरे से साझा की गई। ऐसे करीब दो हजार बदमाश चिह्नित किए गए जो अपराध कर दूसरे राज्य में जाकर रह रहे हैं।
- हर जिला अपने यहां के बदमाशों के फिंगरप्रिंट दूसरे जिले से साझा करेगा, जिससे किसी भी वारदात में त्वरित मिलान हो सके।
- वारदात होते ही अपराधी के भागने का रूट मैप तैयार कर सीमावर्ती थानों को अलर्ट किया जाएगा।