यज्ञ से बढ़ती है त्याग की प्रवृत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शनिवार को अखिल भारतीय गायत्री परिवार के तत्वावधान में चौबीस कुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ, जिसमें लोगों ने आहुतियां दीं। इस दौरान यज्ञ का महत्व भी बताया गया।
श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली ने यज्ञ की विधिवत शुरुआत की। इस अवसर पर यज्ञाचार्य लक्ष्मण सिंह ने कहा कि यज्ञीय भाव अर्थात त्याग की प्रवृत्ति से समाज की पीड़ा और पतन का निवारण संभव है। यज्ञ के जरिये समाज में सद्गुण, सत्कर्म, प्रतिभा और सेवाभाव का विकास होता है। गायत्री परिवार इन्हीं उद्देश्यों के साथ यज्ञ का आयोजन करता आ रहा है। रूपनारायण दुबे और ओमप्रकाश चौरसिया ने कहा कि जीवन में सेवा का संकल्प लेने से ही यज्ञ सार्थक होगा।
इस अवसर पर प्रो. विजय गोपाल श्रीवास्तव, प्रमोद कांत गंगवार, ओमप्रकाश चौरसिया, एस के गोयल, लखनलाल मिश्रा आदि उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि यज्ञ 24 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह नौ से दोपहर बारह बजे तक चलेगा।
समाज में रहने का तरीका सिखाता है धर्म
झांसी। यज्ञ के दौरान ‘युवाओं में कुपोषित विचारों का शोधन केवल धर्म से ही संभव है’ विषय पर गोष्ठी हुई, जिसमें 20 युवाओं ने अपने विचार रखे।
गोष्ठी में छात्रा पलक सिंह ने कहा कि धर्म केवल हमें पूजा-पाठ ही नहीं सिखाता, बल्कि समाज में रहने का तरीका भी सिखाता है। नेहा सिंह ने कहा कि धर्म का मतलब है अच्छे विचार, अच्छे कार्य और अच्छे संस्कारों को धारण करना। मुस्कान सिंह ने कहा कि हमें अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। गोष्ठी में पहले स्थान पर निर्मला कान्वेंट गर्ल्स इंटर कालेज की पलक सिंह, दूसरे स्थान पर महारानी लक्ष्मीबाई इंटर काले की तनवी तिवारी और तीसरे पर आर्य कन्या महाविद्यालय की प्रज्ञा रहीं। इस मौके पर प्रो. श्रीराम अग्रवाल, दीनदयाल मिश्रा, पवन ओझा, वंशगोपाल द्विवेदी, पुष्पा वर्मा, किरण वर्मा उपस्थित रहे। संचालन दीपेंद्र पाठक ने किया।