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सिविक एमीनिटीज- करारी में जमीन का भू उपयोग बदलेगा-City

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सिविक एमीनिटीज
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हटेंगे खेत-खलिहान, बनेंगे मकान
सब हेड: करारी में खेती की जमीन का भू-उपयोग बदलवाएगा जेडीए
क्रासर
नगर निगम से ली है 44.368 हेक्टेयर भूमि
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
करारी की 44.368 हेक्टेयर कृषि भूमि पर आवासीय कॉलोनी बनेगी। ये जमीन नगर निगम से झांसी विकास प्राधिकरण ने ली है। भू-उपयोग बदलवाने के बाद जेडीए यहां आवासीय कॉलोनी बनाने का प्लान तैयार करेगा।
जेडीए ने 2006 में ग्राम बूढ़ा में बेतवा विहार आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना बनाई थी। लोगों ने यहां जमीन खरीद ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि दो-चार साल में मकान का सपना पूरा हो जाएगा व निजी मकान बना लेंगे, लेकिन 11 साल होने के बाद भी अब तक कॉलोनी में मकान बनाना सपना है। 2006 के बाद जेडीए ने कोई भी कॉलोनी विकसित नहीं की। क्योंकि, जेडीए के पास इसके लिए जमीन नहीं थी। जेडीए ने नगर निगम से करारी में स्थित 44.368 हेक्टेयर जमीन मांगी थी। नगर निगम सदन ने सर्किल रेट पर यह जमीन जेडीए को देने का प्रस्ताव पास कर दिया था। प्रस्ताव पास होने के बाद जमीन की नापजोख की गई और अवैध कब्जे हटवाए गए। इसके बाद जमीन जेडीए को सौंप दी गई।
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झांसी महायोजना- 2021 के तहत जमीन का उपयोग खेती के लिए हो रहा है। प्राधिकरण के पास अन्य कोई जमीन नहीं है। ऐसे में यदि शासन की ओर से अर्फोडेवल हाउसिंग नीति के अंतर्गत आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना आती है तो जेडीए मुश्किल में पड़ सकता है। इसलिए तय किया गया कि आवासीय कॉलोनी करारी में विकसित करने के लिए इस जमीन का भू-उपयोग बदला जाएगा।

उद्देश्य में खरा नहीं उतरा जेडीए
झांसी विकास प्राधिकरण का गठन इसलिए किया गया था, ताकि शहर का सुनियोजित विकास हो व लोगों को रहने के लिए बेहतर सुविधाओं से युक्त कॉलोनी का विकास कराया जाए, ताकि निजी बिल्डरों की मनमानी से आम लोगों को राहत मिले। लेकिन, झांसी विकास प्राधिकरण अपने उद्देश्य में खरा नहीं उतरा है। जेडीए न तो शहर का सुनियोजित विकास कर पा रहा है और न ही अवैध निर्माण पर रोक लगा पा रहा है। स्थिति यह है कि जहां नजर दौड़ाओ अवैध बिल्डिंग सीना ताने खड़ी हैं।
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गरियागांव की जमीन ठंडे बस्ते में
जेडीए ने गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों को आवास निर्माण करने के लिए नगर निगम से गरियागांव में जमीन ली थी। 37.348 हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव नगर निगम सदन में पारित होने के बाद जैसे ही जेडीए ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की तो कुछ लोग अदालत चले गए। इस कारण अब इस जमीन का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।

भू-उपयोग बदलवाएंगे
शासनादेश व गाइड लाइन के अनुसार भू-उपयोग परिवर्तन- 2014 की नियमावली के अंतर्गत किया जाएगा।
- सीपी तिवारी, सचिव, जेडीए
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