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गुलमोहर मरता रहा, बागवां ताकते रहे

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गुलमोहर मरता रहा, बागवां ताकते रहे
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झांसी। ग्वालियर रोड से सटी पीतांबरा कॉलोनी के पार्क में लगे हरे-भरे गुलमोहर के विशाल पेड़ ने आखिरकार दम तोड़ दिया। आठ महीने पहले इस पेड़ की छंटाई के नाम पर अंधाधुंध कटाई की गई थी, जिससे इसका यह हाल हुआ है। पेड़ के स्थान पर यहां अब इसका सूखा तना ही खड़ा हुआ है। इस वृक्ष का दोष सिर्फ इतना था कि इसकी पत्तियां आसपास के कुछ घरों में गिरती थीं। इस पर लोगों को आपत्ति थी।
होमगार्ड ट्रेनिंग सेंटर के सामने स्थित पीतांबरा कालोनी की ज्यादातर आबादी उच्च शिक्षित और धनाड्य वर्ग से आती है। कालोनी के मुख्य द्वार के सामने स्थित पार्क में पिछले साल तक गुलमोहर के हरे-भरे दो पेड़ लगे हुए थे। इनमें से एक पेड़ की शाखाएं आसपास के दो-तीन घरों तक पहुंचती थीं। उन घरों में इस पेड़ की पत्तियां और सिंदूरी फूल झड़ते थे, इनकी सफाई लोगों को भारी पड़ती थी। इस पर कालोनी की सोसायटी ने पेड़ों की शाखाओं की छंटाई का फैसला लिया, लेकिन छंटाई के नाम पर शाखाओं को अंधाधुंध ढंग से काट दिया गया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि यह शानदार पेड़ अब पूरी तरह से सूख चुका है। पार्क में केवल उसका ठूंठ ही खड़ा हुआ है, जो इंसानों द्वारा की जाने वाली प्रकृति की दुर्दशा की कहानी सुना रहा है।
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पक्षियों का प्रिय होता है गुलमोहर
गुलमोहर का पेड़ पक्षियों का प्रिय होता है, इसकी छाया ठंडी होती है। इसके अलावा इस पेड़ पर चींटे और अन्य सूक्ष्म कीट खूब पनपते हैं, जिससे पक्षियों को आसानी से खुराक भी मिल जाती है। यही वजह है कि यह पक्षियों को पसंद आता है। गुलमोहर तेजी से बढ़ने वाली प्रजापति है। इसका पौधा एक साल में दस फिट तक ऊंचा हो जाता है और तीन साल में वृक्ष बन जाता है। इसकी आयु लगभग साठ साल होती है।
‘जिम्मेदार’ का गैर जिम्मेदाराना रवैया
पीतांबरा कालोनी की सोसायटी का इस मामले में बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। सोसायटी के अध्यक्ष बीपी पटेल ने कहा कि उन्हें हरे-भरे पेड़ की इस दुर्दशा की जानकारी ही नहीं है। अपनी कमी छुपाते हुए उन्होंने कहा कि कालोनी में पांच-छह पार्क हैं और केवल एक माली है। ऐसे में देखरेख नहीं हो पाती है। जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त कर कालोनी को हरा-भरा बनाया जाएगा।
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‘सदमे’ से हुई पेड़ की मौत
वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर कटे हुए पेड़ की जांच की है। पेड़ तकरीबन बीस साल पुराना है। सदमे से उसकी मौत हुई है। पेड़ों की अनियंत्रित ढंग से छंटाई करने पर उसकी जड़े भी प्रभावित हो जाती हैं। पेड़ को जरूरत के अनुसार पोषण नहीं मिल पाता है, जिससे वह सूख जाता है। इसे पेड़ को सदमा लगना कहते हैं। यही हाल गुलमोहर के इस पेड़ के साथ भी हुआ। ठीक ढंग से अगर छंटाई की गई होती, तो यह दुबारा पनप गया होता।
- एके मालवीय, एसडीओ, वन विभाग।
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