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प्रभारी मंत्री ने दिए पेयजल योजना की जांच के आदेश-Dehat

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पेयजल योजना की होगी जांच
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सब हेड: प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह बोले छह बार अलग-अलग टेंडर होना घोटाले की ओर इशारा करते हैं
क्रासर
- तीन विभागों के अभियंताओं की कमेटी बनाई
- बबीना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जल संस्थान की शहर के लिए बनाई गई 950 करोड़ रुपये की पेयजल योजना शुरू होने से पहले ही संदेह के घेरे में आ गई है। प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने छह बार अलग-अलग टेंडर कराने पर उसे घोटाला बताते हुए तीन विभागों के अभियंताओं की कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने बबीना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भी जांच कराने को कहा है।
प्रभारी मंत्री ने जल संस्थान के अफसरों से पेयजल योजना के अलग-अलग टेंडर निकालने के बारे में पूछा तो वह इसका जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि नियमानुसार किसी भी योजना के अलग-अलग टेंडर नहीं निकाले जाने चाहिए। गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर उन्होंने बबीना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भी जांच कराने के निर्देश दिए। प्रभारी मंत्री ने जिलाधिकारी से कहा कि भारत सरकार के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता इसकी जांच कराएं और तीन महीने में रिपोर्ट दें। बिजली विभाग नगर क्षेत्र में 22 से 23 घंटे और ग्रामीण क्षेत्र को 18 से 19 घंटे बिजली दे रहा है। यदि किसी कारण से बिजली बाधित रहती है तो इसकी जानकारी कंट्रोल रूम में रहेगी। प्रत्येक तहसील में एसडीएम की अध्यक्षता में कंट्रोल रूम बनाए जाएं और कहां कि कितनी बिजली आ रही है, इसकी नियमित रिपोर्टिंग जिलाधिकारी को करें। यदि सरकारी चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं तो उनके खिलाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्रवाई करें।
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जिलाधिकारी को गड्ढा मुक्त सड़कों का सत्यापन कराकर 15 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। पहूंज नदी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 1967 में बाढ़ आई थी। सिंचाई विभाग के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि उसके बाद से लेकर अब तक का बाढ़ का औसत निकाल लें, यदि औसत क्षेत्रफल में कोई मकान दायरे में आता है तो उसे तोड़ा जाएगा। भट्टागांव की सड़क सेना द्वारा बंद कर दिए जाने के मामले में कहा कि वह कोशिश करेंगे कि निवासियों को रास्ता दिया जाए। उन्होंने हंसारी में बनने वाले ओवरब्रिज के लिए भी सेना से बात करने का आश्वासन दिया। कुछ थानेदार थाना पाने की जुगाड़ में लगे हैं, इसलिए एसएसपी को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे थानेदारों को रेंज से बाहर किया जाए।
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