पटरियों पर समग्र कॉरीडोर सिस्टम बनाएगा रेलवे
- रेल संरक्षा आयुक्त ने बड़े ब्लाक लेकर काम कराने के दिए निर्देश
- मुजफ्फरनगर हादसे के बाद सजगता को लेकर उठाए कदम
- इंटरनेट पर ‘कोच मित्र’ की तरह एप बनाने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
मुजफ्फरनगर में उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से रेलवे सुरक्षा को लेकर बेहद सजग है। रेल संरक्षा आयुक्त ने पटरियों पर काम करने के लिए समग्र कॉरीडोर सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। इसमें पटरियों पर काम करने के लिए चार घंटे या ढाई- ढाई घंटे बड़े ब्लाक लेकर काम करने को कहा गया है, ताकि इस अवधि में उस सेक्शन की सभी कमियों को एक साथ पूरा किया जा सके।
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर रेल हादसे में रेल प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई थी। जांच में सामने आया था कि ब्लाक न मिलने के बावजूद पटरियों पर काम कराया जा रहा था। मगर, ऐसा पहली बार नहीं हुआ, अक्सर पीडब्लूआई (रेल पथ निरीक्षक) ब्लाक न मिलने पर जोखिम उठाकर काम करते हैं। भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसको लेकर रेल प्रशासन बेहद सजग है।
रेल संरक्षा आयुक्त एसके पाठक ने निर्देश जारी किए है कि स्टेशन, कंट्रोल और पटरियों पर काम करने वाला इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी बेहतर तालमेल बनाकर काम करें। चूंकि, ट्रैक पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण पीडब्लूआई के लिए रखरखाव करना मुश्किल होता जा रहा है। एक के बाद एक ट्रेन ट्रैक पर दौड़ रहीं होती हैं। इस कारण समग्र कॉरीडोर सिस्टम बनाने की जरूरत है। इसमें छोटे-छोटे ब्लाक न लेकर पटरियों का मेंटेनेंस करने के लिए बड़ा ब्लाक लेने के निर्देश दिए है। यह ब्लाक अधिकतम चार घंटे या दो भाग में ढाई- ढाई घंटे का लिया जा सकता है। इस अवधि में उस सेक्शन के सभी काम एक साथ करा लिए जाए। साथ ही सिगनल और संबंधित विभाग भी इस अवधि में अपने काम पूरा कर लें। दूसरा, ‘कोच मित्र’ की तरह इंटरनेट पर एक ‘एप’ (एप्लीकेशन) तैयार किया जाएगा उसमें मेंटेनेंस से जुड़े सभी विभाग जुड़कर अपने कामों को अपलोड करेंगेे, इससे मेंटेनेंस के काम सभी की जानकारी में बने रहेंगे।
ये होता है ब्लाक
रेलवे की भाषा में ब्लाक वह समयावधि है जिसमें ट्रैफिक रोककर मरम्मत का काम किया जाता है। यह जोखिम सुरक्षा के बंदोबस्त करने के बाद ही उठाया जाता है।
ये हैं पटरियों पर सुरक्षा के इंतजाम
- सिंगल लाइन पर छह सौ और बारह सौ मीटर की दूरी पर दोनों तरफ लाल बैनर फ्लैग लगाने पड़ते हैं।
- सिंगल लाइन पर दोनों तरफ तीन-तीन ट्रैकमैन और डबल लाइन पर तीन ट्रैकमैन लाल झंडी लेकर निश्चित दूरी पर खड़े करने पड़ते हैं।
- कर्मचारी न होने पर खतरे का संकेत देने के लिए आठ सौ मीटर की दूरी पर पटाखे भी लगाए जाते हैं।
ये देना पड़ता है ध्यान
- कहीं पटरी चटकी तो नहीं
- स्लीपर तो खराब नहीं हो गए
- चाबियां ढीली तो नहीं
- ज्वाइंट पर वेल्डिंग की जरूरत तो नहीं
- क्रासिंग प्वाइंट ठीक से काम कर रहे कि नहीं
- पटरी बदलने की जरूरत तो नहीं
ऑफिस और बंगलों से हटेंगे गैंगमैन
रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी किए हैं कि ऑफिस और अफसरों के बंगलों में काम करने वाले गैंगमैन को हटाकर उनको पटरियों के रखरखाव के मूल काम में लगाया जाए। इससे गैंग में पर्याप्त कर्मचारी होंगे और इससे उन पर काम का दबाव अधिक नहीं रहेगा। वे बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे।
डीआरएम ने निरीक्षण किया
मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार मिश्रा ने मंगलवार को स्पेशल ट्रेन से झांसी-आगासौद सेक्शन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बबीना, तालबेहट, ललितपुर समेत उक्त सेक्शन के सभी प्रमुख स्टेशनों पर मेन लाइन और लूप लाइनों की बारीकी से जानकारी ली।