इंसुलिन थेरेपी से दूर होगी गर्भावस्था जनित मधुमेह
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- योगी सरकार शुरू कर रही जीडीएम योजना
- प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालयों पर होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
गर्भावस्था जनित मधुमेह को खत्म कर सुरक्षित प्रसव कराने के लिए योगी सरकार अब गेस्ट्रेशनल डायिबटीज मलाइटस (जीडीएम) योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालयों पर गर्भावस्था में मधुमेह की जांच अनिवार्य की जा रही है। महिला के गर्भवती होने का पता लगते ही उसका मधुमेह की जांच शुरू कर दी जाएगी। इसको ठीक करने के लिए इंसुलिन थेरेपी भी चलाई जाएगी।
गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान तेजी से शुगर में उतार-चढ़ाव आता है। इस कारण पता नहीं चल पाता कि गर्भवती पहले से डायबिटिक है या नहीं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक ऋषिराज सिंह ने बताया अब गर्भावस्था का पता लगते ही एएनएम गर्भवती को 75 ग्राम ग्लूकोज घोल कर पिलाएगी। ठीक दो घंटे बाद गर्भवती महिला की प्लाज्मा ग्लूकोज की जांच होगी। यदि रिपोर्ट नकारात्मक आती है तो फिर यही जांच दोहराई जाएगी। वहीं, अगर शुगर होने का पता चल जाता है तो स्वास्थ्य इकाई पर रेफर कर दिया जाएगा। यहां डॉक्टर गर्भवती को खान-पान और व्यायाम संबंधी जानकारी देंगे। 14 दिन बाद फिर से गर्भवती की एएनएम द्वारा शुगर की जांच की जाएगी। अगर फिर से शुगर का पुष्टि होती है, तो इंसुलिन थेरेपी शुरू हो जाएगी। हर 15-15 दिन में खाने के दो घंटे बाद ग्लूकोज पानी में घोलकर पिलाया जाएगा। इसके बाद प्लाज्मा ग्लूकोज की जांच होगी। जब तक पॉजिटिव रिपोर्ट मिलती रहेगी, तब तक इंसुलिन थेरेपी चलती रहेगी।
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पांच फीसदी को होती बीमारी
एक आंकड़े के अनुसार देश में लगभग पांच फीसदी गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था जनित मधुमेह रोग का शिकार हो जाती हैं। अगर यह ठीक नहीं होता तो बच्चे को भी मधुमेह रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, ऑपरेशन के घाव जल्दी ठीक नहीं होते हैं।