गृहकर की आपत्तियां उजागर कर रहीं नगर निगम की खामियां
झांसी। नगर निगम में बढ़े क्षेत्रफल पर हाउस टैक्स वसूलने की आपत्तियां रोजाना आ रहीं हैं। संशोधन के लिए लोग चक्कर काट रहे हैं। कुछ की समस्याओं को दूर किया जा रहा है लेकिन कुछ अब भी परेशान हैं।
अपर नगर आयुक्त रोहन सिंह ने बताया कि वर्ष 2015-16 में नगर निगम ने हाउस टैक्स के लिए सर्वे कराया गया था। डोर-टू-डोर सर्वे के बाद घरों और दुकानों के बिल तैयार हुए। इन बिलों में धनराशि के साथ अन्य जानकारियां दीं गईं हैं पर यह नहीं दर्शाया गया कि उक्त टैक्स कितने क्षेत्रफल का लिया जा रहा है। इसकी जानकारी कई लोगों को है भी नहीं। सीपरी बाजार निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि उनके घर का क्षेत्रफल 2400 वर्गफुट है। लेकिन, नगर निगम ने तीन हजार वर्गफुट से अधिक पर टैक्स वसूल किया है।
इसी प्रकार से शहर क्षेत्र के सरांय मोहल्ला के गौरव ने बताया कि उनका घर 650 वर्गफुट है पर 1100 से अधिक वर्गफुट पर टैक्स वसूल किया जा रहा है। वहीं, सराफा बाजार निवासी किशन सोनी ने बताया कि उनकी दुकान 500 वर्गफुट की है लेकिन नगर निगम उनसे 890 वर्गफीट पर टैक्स वसूल रहा है। नरसिंह राव टोरिया निवासी कृष्णकांत अग्रवाल ने बताया कि उनका मकान एक हजार वर्गफीट में निर्मित है पर नगर निगम ने ढाई हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में मकान दर्शाकर टैक्स रसीद थमा दी। इतना ही नहीं उसमें एक दुकान और दर्शा दी गई जो कि है ही नहीं।
ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मामले रोजाना नगर निगम पहुंच रहे हैं। जिनमें से कुछ लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो रहा है।
तभी तो बढ़ गया बोझ
वर्ष 2013 से पूर्व रेंट बेस सिस्टम पर हाउस टैक्स वसूल किया जाता था। लेकिन, उसके बाद से एरिया बेस सिस्टम के आधार पर क्षेत्रफल के हिसाब से संसोधन हुआ है। इसमें कुछ लोगों को राहत भी मिली है पर कई लोगों का क्षेत्रफल बढ़ा दिया गया है। यही कारण है कि हाथ में थमाई गई रसीद में टैक्स बढ़कर आ रहा है। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त का मानना है कि नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की 16 टीमें गठित हुईं थीं। सभी ने डोर-टू-डोर जाकर जांचोपरांत सूची तैयार की है तथा एक खास सॉफ्टवेयर के माध्यम से बिलों को तैयार किया गया है।
रसीद में क्यों नहीं दर्शाया क्षेत्रफल?
हाउस टैक्स की जो रसीद घर-घर पहुंचाईं जा रहीं हैं। उनमें अधिकांश जानकारियां हैं। लेकिन, मकान का क्षेत्रफल नहीं दर्शाया गया है। यह जानकारी केवल नगर निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यही कारण है कि कई लोग वेबसाइट से भी जानकारियां हासिल नहीं कर पा रहे हैं। वार्ड क्रमांक 51 निवासी एससी तिवारी ने बताया कि वेबसाइट पर जब उन्होंने सारी जानकारियां अंकित की तो उनके सामने जो बिल आया उसमें हर जगह शून्य दर्शाया गया है। जबकि, टैक्स रसीद 1050 रुपये की उन्हें थमाई गई है। इस पर उन्होंने रसीद में क्षेत्रफल न दर्शाने पर आपत्ति जताई है।
हाउस टैक्स की रिवाइज दरों को लागू करने के पहले आपत्तियां मांगी गईं थी तथा काउंटर भी लगाए गए थे। जो आपत्तियां आईं उनका निस्तारण भी हुआ और जिन्होंने आपत्ति नहीं दी, उनका मान लिया गया कि उनके द्वारा दर्ज की गई जानकारियां सही हैं। अब, केवल न्यायालय में ही मामला जाने के बाद ही संसोधन हो पाएगा। - रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त