व्यवस्था बदहाल, इलाज नहीं रेफर कर रहे सरकारी अस्पताल
सब हेड: डेंगू का प्रकोप जारी, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खराब
प्रशांत शर्मा
- हालत बदतर, स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही
कॉमन इंट्रो: झांसी में स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज दोनों जगहों पर डेंगू पीड़ितों के लिए प्लेटलेट्स नहीं हैं। उधर, डेंगू का हमला बदस्तूर जारी है। अब जेल में भी डेंगू की दस्तक हो गई है। कुछ बंदियों में डेंगू जैसे लक्षण और प्लेटलेट्स बेतहाशा गिरने के बाद उन्हें मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया गया है। सरकारी अस्पतालों में प्लेटलेट्स न होने पर उन्हें पीजीआई तक भेजने की नौबत आ गई। वहीं, मेडिकल कॉलेज में सर्जरी के नाम पर मजाक हो रहा है। मॉड्यूलर ओटी का एयर कंडीशनर खराब होने के कारण बुधवार को पंखे की हवा में 18 ऑपरेशन किए गए। इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं थी।
मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स नहीं
झांसी। डेंगू का सीजन चल रहा है। मच्छरों का प्रकोप जगह-जगह फैला हुआ है। इसके बावजूद डेंगू के मरीजों को चढ़ाई जाने वाली प्लेटलेट्स सरकारी तंत्र के पास नहीं है। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भर्ती मरीजों को कानपुर, लखनऊ, ग्वालियर, दिल्ली रेफर कर रहे हैं। इससे मरीजों की जान जोखिम में है। हालात बदतर होते जा रहे हैं।
डेंगू का मच्छर जब शरीर में काटते हैं तो वायरस फैल जाता है। ये वायरस प्लेटलेट्स की निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करता है। सामान्यत: हमारे शरीर में एक बार प्लेटलेट्स का निर्माण होने के बाद पांच से दस दिन तक रहता है। जब इनकी संख्या घटने लगती है, तब शरीर आवश्यकता के हिसाब से इनका दोबारा निर्माण कर देता है। वहीं, डेंगू के वायरस प्लेटलेट्स निर्माण की क्षमता को कम कर देते हैं। डेंगू के दौरान यदि रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स लगातार गिरने लगती हैं तो इसकी पूर्ति भी प्लेटलेट्स चढ़ाकर की जाती है। डेंगू बुखार बढ़ने पर प्लेटलेट्स तेजी से गिरती हैं। इस स्थिति में ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। यदि रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा 40 हजार से कम होती है, तो मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एक मरीज को कम से कम दो यूनिट प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है। प्लेटलेट्स कम होने से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
डेंगू के इस सीजन में महानगर के सरकारी तंत्र के पास डेंगू के मरीजों की जान बचाने के लिए जरूरी प्लेटलेट्स नहीं हैं। जिला अस्पताल और महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज दोनों जगह ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में डेंगू मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत जब बिगड़ने गलती है तो वह उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज से जब स्थिति नहीं संभलती तो वह मरीज को ग्वालियर, कानपुर मेडिकल कॉलेज, पीजीआई लखनऊ, दिल्ली के एम्स समेत बड़े अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। इससे मरीज की जान सांसत में रहती है। यदि जल्द मशीनों को नहीं सुधरवाया गया, तो डेंगू पीड़ित की जान जा सकती है।
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ब्लड क्लॉटिंग करती प्लेटलेट्स
प्लेटलेट्स का काम ब्लड क्लॉटिंग है यानी बहते खून पर थक्का जमाना, जिससे ज्यादा खून न बहे। अगर इनकी संख्या रक्त में 30 हजार से कम हो जाए, तो शरीर के अंदर ही खून बहने लगता है। शरीर में बहते-बहते यह खून नाक, कान, यूरीन आदि से बाहर आने लगता है। कई बार ब्लीडिंग शरीर के अंदरूनी हिस्सों में होने लगती है।
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डेंगू में प्लेटलेट्स घटने की लक्षण
- यूरिन या मल से खून आना।
- मसूड़ों या नाक से खून आना।
- शरीर पर अपने आप या आसानी से खरोंच के निशान बनना।
- शरीर पर छोटे या बड़े लाल-बैगनी रंग के धब्बे दिखना, खासकर पैर के निचले हिस्से में।
वर्जन
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का एक पार्ट खराब हो गया है। संबंधित कंपनी ने भी उसे जर्मनी से मंगवा लिया है। मंगलवार को कंपनी ने टेक्नीशियन भेजने को कहा था लेकिन नहीं आया। एक-दो दिन में मशीन ठीक करवा ली जाएगी। - डॉ. मुरारीलाल आर्या, ब्लड बैंक प्रभारी मेडिकल कॉलेज।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के सर्वर में समस्या आ गई थी। उसका पार्ट दिल्ली से मंगवा लिया गया है। कंपनी को भी बार-बार रिमाइंडर भेजा है। बृहस्पतिवार को कंपनी के टेक्नीशियन ने आने को कहा है। इसी दिन मशीन ठीक हो जाएगी। - डॉ. एमएस राजपूत, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल।