फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जोर पकड़ रहा अलग बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा-Lalitpur

विज्ञापन
विज्ञापन
जोर पकड़ रहा बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा
विज्ञापन

सब हेड: सत्याग्रह आंदोलन में कांग्रेस खुलकर आगे आई
- पूर्व केंद्रीय मंत्री और चार पूर्व विधायकों ने उठाई मांग
- बांदा, महोबा और हमीरपुर में भी चल रहा है आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग जोर पकड़ती जा रही है। एक सप्ताह से बुंदेलखंड संयुक्त मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे अनिश्चितकालीन सत्याग्रह में बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की। पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत झांसी, ललितपुर, दतिया और मौदहा के पूर्व विधायकों ने अलग बुंदेलखंड की मांग का समर्थन किया।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले एक चुनावी जनसभा में सांसद/केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा था कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो तीन साल में अलग बुंदेलखंड राज्य का गठन हो जाएगा। तब से लेकर तीन साल तक शांति रही। अलग राज्य के पैरोकारों को लगता था कि राज्य का गठन हो जाएगा, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो फिर से आंदोलन शुरू हो गया। यह आंदोलन अकेला झांसी में ही नहीं, बल्कि बांदा, महोबा और हमीरपुर में भी चल रहा है। विभिन्न राजनीतिक संगठन एकजुट होकर अलग बुंदेलखंड राज्य की लड़ाई लड़ रहे हैं।
विज्ञापन

बुधवार को जिला और शहर कांग्रेेस कमेटी ने सत्याग्रह का समर्थन किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि कांग्रेस अलग बुंदेलखंड राज्य की पक्षधर है। 2012 के विधानसभा चुनाव से ही पार्टी बुंदेलखंड की वकालत कर रही है। तत्कालीन कांग्रेस विधायक रहते हुए मैंने, बांदा के विधायक विवेक सिंह और उरई के विधायक विनोद चतुर्वेदी ने विधानसभा के पटल पर अलग बुंदेलखंड राज्य का प्रस्ताव रखा था। पूर्व मंत्री बादशाह सिंह ने कहा कि किसानों, व्यापारियों, छुट्टा जानवरों, अधिवक्ताओं और छात्रों की समस्याओं का समाधान अलग बुंदेलखंड राज्य से होगा। पूर्व विधायक बृजेंद्र कुमार व्यास, पूर्व विधायक ललितपुर राजेश खैरा, पूर्व विधायक दतिया शिवचरण पाठक, बुंदेलखंड किसान पंचायत के गौरीशंकर बिदुआ ने अलग बुंदेलखंड राज्य की वकालत की। इसके बाद सभी ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस मौके पर भानू सहाय, रघुराज शर्मा, डॉ. सुनील तिवारी, राजेंद्र शर्मा, सुनील अग्रवाल, सत्येंद्र पाल सिंह, इम्तियाज हुसैन, अखलाक मकरानी, हिना कौशर, सीडी लिटौरिया, हरिवंश लाल, अफजाल हुसैन, अनिल रिछारिया मौजूद रहे।
बॉक्स..
बसपा भी आंदोलन में कूदेगी
अलग राज्य की लड़ाई लड़ रहे भानु सहाय ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष गयाचरण दिनकर से मुलाकात हुई थी, उन्होंने आंदोलन में सहयोग करने का वायदा किया है। बसपा जल्द इस लड़ाई में आगे आएगी।

सपा के पूर्व एमएलसी कर चुके हैं समर्थन
समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह दो दिन पहले पार्टी लीक से हटकर अलग बुंदेलखंड राज्य की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सपा अलग बुंदेलखंड का समर्थन नहीं करती है, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व से बात करेंगे कि पार्टी समर्थन करे। पार्टी जरूर तैयार हो जाएगी।

मध्य प्रदेश तैयार हो जाए तो बनेगा
मध्य प्रदेश अलग बुंदेलखंड राज्य के लिए तैयार नहीं है। यदि मध्य प्रदेश तैयार हो जाए तो बुंदेलखंड राज्य बनाने में कोई दिक्कत नहीं है। भाजपा अलग राज्य की पक्षधर है।
विज्ञापन

- हनुमंत सिंह नरवरिया, सांसद प्रतिनिधि
बॉक्स..
पहली बार 1956 में हुई थी वकालत
बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर और मध्य प्रदेश के सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना और दतिया जिले आते हैं। इतिहास में जाएं तो 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद से यह क्षेत्र संयुक्त विंध्य प्रदेश कहलाने लगा और इसकी दो इकाइयां बनीं। पहली बुंदेलखंड व दूसरी बघेलखंड। बुंदेलखंड इकाई की राजधानी नौगांव (मप्र) बनी। बाद में बुंदेलखंड को उप्र और मप्र में बांट दिया गया। तब से लेकर मांग बराबर उठ रही है कि क्षेत्र के विकास के लिए अलग बुंदेलखंड राज्य बनाया जाए। सन 1956 में गठित प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग के सदस्य केएम पाणिक्कर ने बुंदेलखंड राज्य की वकालत की थी, परंतु हुआ कुछ नहीं। लेकिन, तब से लेकर अब तक बुंदेलखंड के नाम पर सियासत बराबर चल रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें