धरातल पर उतरने को बेताब केन-बेतवा की जलधारा
- समझौता पत्र में हस्ताक्षर होना रह गया बाकी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
केन- बेतवा नदी लिंक परियोजना धरातल पर उतरने को बेताब है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सहमति अंतिम चरण में चल रही है। जल्द ही इस परियोजना के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर (एमओयू) होने की उम्मीद है। एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही इस परियोजना पर धरातल पर काम शुरू हो जाएगा।
केन-बेतवा लिंक परियोजना कागजी सफर पूरा करने के बाद धरातल पर उतरने को तैयार है, लेकिन दोनों प्रदेश सरकारों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनने से समझौता रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं हो पा रहे थे। दरअसल, उत्तर प्रदेश ने रबी की फसल के दौरान 50 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी की मांग की है और एमपी सरकार इसका आधा पानी देने को ही तैयार है। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण विभाग लखनऊ के मुख्य अभियंता एनसी जैन ने बताया कि रबी की फसल के लिए यूपी ज्यादा पानी मांग रहा है, जिस पर सहमति लगभग बन गई है। इसको लेकर दिल्ली में बैठक भी हो चुकी है। जल्द ही समझौता पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।
मालूम हो कि, केन-बेतवा लिंक परियोजना का खाका 2008 में तैयार किया गया था। अपने प्रारंभिक दौर में नौ हजार करोड़ रुपये से बढ़कर अब इसकी लागत 19 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के तीन-तीन जिलों की 6,35,661 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी है। परियोजना के मुताबिक उप्र के बांदा व मप्र के छतरपुर जिले की सीमा पर बोधन गांव के निकट गंगोई बांध से केन नदी को तीस मीटर चौड़ी कंक्रीटनहर बनाकर आगे ले जाना है। धसान नदी पर एक टनल (सुरंग) बनाकर आगे बढ़ाया जाएगा। छतरपुर के हरपालपुर से होकर उप्र के मऊरानीपुर बार्डर से मप्र के जतारा तहसील के गांवों से होकर इस नहर को बरुआसागर बांध के ऊपर से होते हुए ओरछा के निचले हिस्से में स्थित नोट घाट पुल में मिला दिया जाएगा।