आंधी तूफान, ओवरलोडिंग में साथ देगा पश्चिमी ग्रिड
झांसी। पश्चिमी और उत्तर क्षेत्र के पावर ग्रिड के जुड़ने के बाद अब बुंदेलखंड में आंधी तूफान और ओवर लोडिंग की समस्या पर भी बिजली नहीं जाएगी। दोनों पावर ग्रिड को जोड़ने के लिए उच्च क्षमता के छह ट्रांसमिशन पावर स्टेशनों का निर्माण किया गया है। इस संयुक्त ग्रिड से एक दूसरे को 2700 मेगावाट बिजली का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
अभी उत्तरी पावर ग्रिड से बुंदेलखंड के सभी जिलों को बिजली मिलती है। इस ग्रिड की ट्रांसमिशन लाइनें बुंदेलखंड के अलावा अलीगढ़ तक फैली हैं। आंधी तूफान के दौरान या फ्रीक्वेंसी कम होने पर उत्तरी ग्रिड की सप्लाई ठप होेने का खतरा बना रहता है। अगर ग्रिड फेल होता है तो पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। बिजली ढांचा मृत सामान हो जाता है। दोबारा ग्रिड में बिजली दौड़ाने में मशक्कत करनी पड़ती है। यह समस्या न हो इसके लिए ऊर्जा मंत्रालय सभी पावर ग्रिडों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम कर रही है। इसी पहल के तहत पश्चिमी एवं उत्तर क्षेत्र के अंतर क्षेत्रीय सुदृढ़ीकरण विद्युत पारेषण प्रणाली परियोजना में पश्चिमी और उत्तरी ग्रिड को जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना पर 4976 करोड़ का बजट खर्च हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस योजना का लोकार्पण किया था। इस योजना के तहत जबलपुर, उरई, अलीगढ़, सतना, ग्वालियर, मेरठ, कानपुर और आगरा के बीच 800 किलोमीटर से अधिक पावर ग्रिड लाइनें (सर्किट) बिछाई गई हैं। साथ ही उरई में 2000 एमवीए क्षमता का 765/400 केवी और अलीगढ़ में 765 केवी सबस्टेशन बनाया गया है। पावर ग्रिड के मैनेजर नीरज पांडे ने बताया कि इस परियोजना से पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड क्षेत्र के उरई, झांसी, अलीगढ़ और आसपास क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ गई है। दोनों ग्रिड के बीच 2700 मेगावाट बिजली आदान प्रदान करने की क्षमता में वृद्धि भी हो गई।
यह होता है पावर ग्रिड
बिजली बनाने वाली सभी उत्पादन इकाइयां करंट को पावर ग्रिड की ट्रांसमिशन लाइनों में डालने का काम करती हैं। ट्रांसमिशन लाइनों की मदद से करंट को पावर हाउसों तक पहुंचाया जाता है, जहां से करंट को सबस्टेशनों तक आगे बढ़ाया जाता है। सबस्टेशन से बिजली फीडरों के द्वारा ट्रांसफार्मरों तक पहुंचती है। ट्रांसफार्मर से बिजली का वितरण घरों तक किया जाता है।