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फ्राड केस: जल संस्थान के अफसरों की होगी जांच

Wed, 16 Jan 2019 01:38 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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झांसी। जलसंस्थान में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की जांच में फंसे अफसर और कर्मचारियों की विजिलेंस अब संपत्ति की भी जांच करेगी। 35 अफसर और कर्मचारियों में से विजिलेंस की दस पर सबसे अधिक निगाह हैं, जिन्होंने चंद सालों में आलीशान घर, फार्म हाउस और अन्य संपत्तियां बना लीं। विजिलेंस ने शासन से अनुमति लेने के बाद जानकारी जुटाना शुरू कर दी है।
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जलसंस्थान में व्याप्त 508 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की जांच में विजिलेंस को 41.95 करोड़ का घोटाला मिला है, जिसका हिसाब विभाग के पास नहीं है। इस घोटाले में पूर्व महाप्रबंधक, अधिशासी अभियंता, अवर अभियंता, सहायक अभियंता, सचिव समेत 35 अधिकारी और कर्मचारी प्रथम दृष्टया दोषी (संलिप्त) पाए गए हैं। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। इसमें सामग्री आपूर्ति करने वाली चार फर्मों के नाम भी शामिल हैं। विजिलेंस ने शिकायत के आधार पर अब इन अफसरों की संपत्ति के बारे में भी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। इसके लिए शासन से भी अनुमति ले ली गई है।

पता चला है कि इनमें एक पूर्व महाप्रबंधक ने 25 से 30 करोड़ रुपये बाजार में बड़े-बड़े कारोबारियों को दे रखा है। बिल्डर्स के साथ भी पैसा लगा रखा है। एक सेवानिवृत्त पूर्व महाप्रबंधक ने पहूज के पास फार्म हाउस और खेती की जमीन ले रखी है। एक पूर्व अधिशासी अभियंता ने शिवपुरी रोड पर 10 एकड़ से अधिक जमीन लेकर रखी है। वर्तमान में कार्यरत एक सहायक अभियंता ने अपने एक परिजन की कंस्ट्रक्शन कंपनी में पैसा लगा रखा है। सेवानिवृत्त वित्त प्रबंधक ने कई घर बना लिए हैं।
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सेवानिवृत्त अवर अभियंता ने मेडिकल कॉलेज पर एक क्लीनिक, घर व आसपास क्षेत्र में कई एकड़ जमीन खरीद रखी है। एक अवर अभियंता ने रायबरेली और कानपुर में फैक्ट्री खोल रखी है। एक सेवानिवृत्त अवर अभियंता ने ग्वालियर रोड पर फॉर्म हाउस बना रखा है। कई अफसरों ने लखनऊ, आजमगढ़, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर में संपत्ति अर्जित कर रखी है। विजिलेंस निरीक्षक आरके सिंह ने बताया कि संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया गया है।

इनकी चल रही जांच
इस मामले में सेवानिवृत्त तत्कालीन महाप्रबंधक इंद्रदेव पांडे, तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र, अवर अभियंता डीपी राय, संघभूषण, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह चौधरी, धर्मपाल सिंह, सेवानिवृत्त अवर अभियंता विजय बहादुर सिंह, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता इंद्रपाल सिंह, सेवानिवृत्त वित्त प्रबंधक विलोक कुमार चौबे, सेवानिवृत्त लेखाकार ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता सीताराम साहू, सेवानिवृत्त सचिव अनिल कुमार जायसवाल, सचिव हरिश्चंद्र वाल्मीकि, अधिशासी अभियंता पीएन सिंह यादव, महाप्रबंधक रतनलाल, सेवानिवृत्त महाप्रबंधक रामपूजन वर्मा, सचिव आरएस कनौजिया, महाप्रबंधक वीएन द्विवेदी, अधिशासी अभियंता राधेश्याम यादव, सचिव रघुवेंद्र कुमार, अवर अभियंता प्रवीण कुमार, सेवानिवृत्त स्टोर कीपर श्रीधर शर्मा, स्टोर प्रभारी मोहम्मद रफीक, सेवानिवृत्त लेखाकार शिखर चंद्र जैन, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी विनोद चंद्र पाराशर, मंडल कैशियर मनीष कुमार अग्रवाल, अधिशासी अभियंता मनोज कुमार आर्या, वीके पांडे, आरएस सक्सेना, सहायक अभियंता राकेश कुमार निरंजन, वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, आडीटर मोहम्मद शफीक, लेखाकार श्याम बाबू को प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं।

यह भी जानिए
जलसंस्थान में एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2017 तक के भुगतानों में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) कर रहा है। जलसंस्थान महाप्रबंधक ने विजिलेंस को सवा लाख पन्नों का जो रिकार्ड उपलब्ध कराया है, उस हिसाब से शासन ने उक्त अवधि में 508 करोड़ का बजट दिया। इसमें 126 करोड़ सामग्री आपूर्ति और 173 करोड़ का मरम्मत (स्टीमेट) काम किया गया। बाकी बजट वेतन, पेंशन और अन्य भुगतानों पर खर्च किया गया। विजिलेंस ने 299 करोड़ की जांच के बाद जो निचोड़ निकाला है, उसमें 41.95 करोड़ की वित्तीय अनियमितता प्रथम दृष्टया साबित हुई।
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