दूसरी बार में भी शराब की 49 दुकानों में रुचि नहीं
- ई-लाटरी से 32 दुकानों का आवंटन
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
आबकारी विभाग ने एक बार फिर ई-लाटरी के जरिये शराब की दुकानों का आवंटन किया। शराब कारोबारियों ने 81 दुकानों में से सिर्फ 32 में रुचि दिखाई। वह भी एक-एक कारोबारी ने हिस्सा लिया। बाकी 49 दुकानों के लिए कोई आवेदन नहीं आया। इन दुकानों के लिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
जिले में 233 देसी शराब की दुकानें, 72 विदेशी शराब, 57 बीयर और चार मॉडल शाप हैं। इन दुकानों के आवंटन के लिए प्रदेश में पहली बार ई-लाटरी हुई थी। इसमें से 171 देसी, 63 अंग्रेजी, 48 बीयर और तीन मॉडल शॉप तो आवंटित हो गई थीं, जबकि 81 दुकानें शेष रह गई थीं। इन दुकानों की ई-लाटरी सोमवार को फिर से निकाली गई। अपर आयुक्त उर्मिला सोनकर खाबरी, मुख्य विकास अधिकारी ए. दिनेश कुमार, उप आबकारी आयुक्त एसके राय, आरएस शुक्ला, जिला आबकारी अधिकारी मृत्युंजय प्रताप सिंह की मौजूदगी में हुई ई-लाटरी में देसी शराब की 21 दुकानों, अंग्रेजी की चार व बीयर की सात दुकानों का आवंटन हो गया।
दुकानें लेने में शराब कारोबारी रुचि नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह लाइसेंस फीस बढ़ जाना है। शासन का मानना है कि इससे अतिरिक्त राजस्व की आय बढ़ जाएगी। एक साल पहले तक 153 करोड़ रुपये सालाना राजस्व आता था, जो पिछले साल बढ़कर 207 करोड़ रुपये कर दिया गया था। नई आबकारी नीति लागू होने से तीस प्रतिशत अतिरिक्त आय होगी। लेकिन, अभी भी 49 दुकानों का आवंटन नहीं हो सका है। ऐसे में माना जा रहा है कि शासन जिस राजस्व की बढ़ोत्तरी की उम्मीद जिले को है, वह मिल पाना आसान नहीं लग रहा है। क्योंकि, जो 49 दुकानें शेष रह गई हैं, उनके लिए जिले में कोई भी शराब कारोबारी रुचि नहीं ले रहा है।
मध्य प्रदेश से सीखें
जो नीति वर्तमान में प्रदेश सरकार अपना रही है, कुछ साल पहले तक उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश भी चल रहा था। इससे आबकारी विभाग को लगातार घाटा हो रहा था, क्योंकि वहां पर भी घाटे की दुकानें लेने को कोई आगे नहीं आना चाह रहा था। बाद में मध्य प्रदेश शासन ने नीति में बदलाव किया और शर्त रख दी कि जो तीन मुनाफे की दुकानें लगेा, उसे दो घाटे वाली दो दुकानें भी लेनी पड़ेंगी। इसका नतीजा यह हुआ कि मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग को मुनाफा होने लगा और सभी दुकानें आवंटित होने लगीं।
निर्धारित शराब नहीं उठाने पर रिकवरी होगी
जो आबकारी दुकानदार निर्धारित कोटा की शराब नहीं उठाएगा, उससे प्रति लीटर 250 रुपये की वसूली की जाएगी। जो दुकानदार समय पर पैसा जमा नहीं करेगा, उससे राजस्व की भांति रिकवरी की जाएगी।