बुंदेलखंड को दगा दे गया मानसून
सब हेड: अब तक हुई सिर्फ 31 प्रतिशत बरसात, अभी बारिश के आसार
क्रासर
30 सितंबर को पूरा हो जाएगा बारिश का मौसम
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
एक बार फिर मानसून बुंदेलखंड को दगा दे गया है। मानसून की विदाई 30 सितंबर को हो जाएगी। अभी तक जिले में 273.36 मिलीमीटर बरसात हुई, जो औसत वर्षा 863.80 मिलीमीटर के सापेक्ष कुल 31.65 प्रतिशत है। सितंबर में सिर्फ 22.40 मिलीमीटर बरसात हुई है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 से 24 सितंबर तक बारिश हो सकती है।
बुंदेलखंड की त्रासदी है कि यहां हर दो साल में सूखा पड़ता है तो कभी अतिवृष्टि हो जाती है। इस कारण यहां का किसान कर्ज के मकड़जाल में उलझा रहता है। सूबे की सरकार द्वारा एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने से किसानों को उम्मीद थी कि अबकी बार किसी के सामने कर्ज लेने के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा, लेकिन उनकी उम्मीदों पर मानसून की बेरुखी ने पानी फेर दिया है। बुंदेलखंड में मानसून 30 सितंबर को समाप्त हो जाता है। यदि बरसात की स्थिति देखें तो इस बार बहुत कम पानी बरसा है।
क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र भरारी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद ने बताया कि 21 से 24 सितंबर तक घने बादल छाए रहेंगे। पहले हल्की, फिर 22 सितंबर को अच्छी बरसात होने की संभावना है। 24 तारीख तक बरसात के आसार हैं।
बरसात की स्थिति
महीना औसत वर्षा कुल वर्षा
जून 276.20 मिमी 34.06 मिमी
जुलाई 283.90 मिमी 144.48 मिमी
अगस्त 303.70 मिमी 94.82 मिमी
सितंबर 171.30 मिमी 22.40 मिमी
हो सकता है सूखा घोषित
पानी कम बरसने से सूखा के आसार बहुत पहले से मंडराने लगे थे। जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने फसल ऋण माफी कार्यक्रम के दौरान किसानों को आश्वासन दिया था कि सूखा की आशंका है, इसलिए इस पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी।
सर्वे हो रहा
फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को देने के लिए खरीफ की फसलों का सर्वे किया जा रहा है। उम्मीद है कि जिले का सूखाग्रस्त घोषित करने से पहले फसलों का सर्वे हो जाएगा।
दस साल पहले हुई थी कम बरसात
इससे पहले दस साल पूर्व2006-07 में जिले में 336.09 मिलीमीटर पानी बरसा था। इसके अलावा 2007-08 में 342.74 मिलीमीटर, 2009-10 में 539.06, 2010-11 में 558.51 और 2015-16 में 500.30 मिलीमीटर बरसात हुई थी।
अक्तूबर में पोस्ट मानसूनी बरसात के आसार
भले ही मानसूनी बरसात से दगा दे दिया हो, पर अक्तूबर में पोस्ट (मानसून के बाद) मानसूनी बरसात होने की संभावना है।
किसानों को सलाह
कृषि और मौसम विभाग के वैज्ञानिक डा. मुकेश चंद ने किसानों को सलाह दी है कि मूंग की पकी फलियां टूटने के बाद खेत में हरी खाद देने के लिए फलियों को खेत में ही पलट दें, ताकि खेत को जैविक रसायन मिल सके। सभी खाली खेतों मेें हैरो से जुताई करें। इससे खरपतवार नियंत्रित रहेंगे तथा पानी बरसने की स्थिति में खेत में नमी का सुरक्षित रहेगी। खेत में खीरा, ककड़ी और सब्जी भिंडी, करेला, लौकी व कद्दू की उचित देखभाल करें। सब्जियों का कीड़ों से बचाव करने के लिए मोनोक्रोटोफास एक लीटर को आठ सौ लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें और सब्जियों को सुरक्षित करें। जानवरों को खुरपका, मुंह पका और गलाघोंटू बीमारी से बचाव को टीके लगवाएं। पेट के कीड़े मारने के लिए ऐलबंडाजॉल दवा का प्रयोग करें। जानवरों को छुट्टा न छोड़ें।