हेडिंग - बंद होंगी बिजली उत्पादन की छोटी यूनिटें
पारीछा थर्मल पावर प्लांट की दो इकाइयां ठप
पुरानी प्लांटों पर काम करना घाटे का सौदा है
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन घाटे से उबरने के लिए 20 साल से अधिक पुरानी 110 मेगावाट और इससे कम क्षमता की उत्पादन इकाइयों को बंद करने की तैयारी कर रहा है। इसके पीछे बड़ा कारण यूनिटों का पुराना होने के कारण और उत्पादन लागत बढ़ना है। इसी कड़ी में पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो इकाइयों को बंद कर दिया गया है।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो और 250 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। इनमें 110 मेगावाट की नंबर एक इकाई मेंटेनेंस के कारण जुलाई 2016 से बंद है। पिछले 20 दिन से 110 मेगावाट की नंबर दो इकाई को भी बंद कर दिया गया है। इन्हें अब स्थायी रूप से बंद करने की तैयारी है। बताया गया कि कारपोरेशन डिमांड कम बताकर अपनी पुरानी इकाइयों को बंद करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहा है। पुरानी इकाइयों की बिजली प्राइवेट कंपनियों से भी महंगी पड़ रही है। पुरानी उत्पादन इकाइयां आए दिन खराब हो जाती हैं। उनकी मरम्मत में बड़ी रकम खर्च होती है और इस दौरान उन्हें बंद करना पड़ता है। निजी कंपनियों के मुकाबले इन सरकारी उत्पादन यूनिटों की बिजली मंहगी पड़ती है। इस कारण कारपोरेशन 110 मेगावाट और इससे कम क्षमता की उत्पादन इकाइयां बंद करने पर विचार कर रहा है और इस पर काम भी शुरू हो गया है। यह सब घाटे से उबरने की कवायद बताई जा रही है। पारीछा के अलावा पनकी, अनपरा और हरदुआ पावर प्लांटों की 110 मेगावाट इकाइयां भी स्थायी रूप से बंद की जा सकती हैं। इस पर विचार हो रहा है। प्रदेश में संचालित सभी इकाइयों से लगभग पांच हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है।
यह नीतिगत मामला है
प्लांट की पांच मशीनें 1030 मेगावाट उत्पादन करने के लिए पूरी तरह फिट हैं। बिजली की डिमांड कम होने के कारण 110 मेगावाट की नंबर दो इकाई को बंद किया गया है। हां, यह भी सही है कि पुरानी इकाइयों को बंद करने की कार्यवाही चल रही है, लेकिन यह फैसला केंद्र और प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्रालय को लेना है। यह एक नीतिगत मामला है।
अरुण कुमार, अधीक्षण अभियंता (हेडक्वार्टर) पारीछा थर्मल पावर प्लांट।