सटोरियों के खिलाफ छेड़ा गया आपरेशन-720 ठंडा पड़ता दिख रहा है। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई बड़े सटोरियों को गिरफ्तार करने के साथ 17 को वांछित बताया था लेकिन, करीब आठ दिन बाद भी आशीष उपाध्याय के सिवाय पुलिस दूसरे किसी वांटेड सटोरिये को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
आईपीएल शुरू होने के बाद करोड़ों रुपये की सट्टेबाजी का खेल शुरू हो गया था। नवाबाद पुलिस ने 28 अप्रैल को बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बबीना निवासी विवेक यादव को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने सत्येंद्र यादव, धर्मेंद्र साहू, हर्ष साहू, निशांत यादव उर्फ रोलेक्स, अरुण यादव, अंकित यादव, नीलेश यादव एवं कुलदीप दिवाकर जैसे बड़े सटोरियों के नाम बताए। यह हर सीजन में करोड़ों का खेल करते थे। पुलिस ने सभी को वांटेड मानते हुए तलाश शुरू की। इसके बाद इससे भी बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने शातिर सट्टेबाज शुभम उपाध्याय, विजय बाधवा एवं नितिन अग्रवाल को दबोचा। इनसे पूछताछ में भाजपा नेता एवं किसान मोर्चा कोषाध्यक्ष आशीष उपाध्याय, पार्षद पति पप्पू यादव, पंकज राय, सौरभ लिखधारी, सोनू चड्ढा, हरीश कुमार, आकाश चंचलानी, सुमित साहू एवं रोशन मुंशी का नाम सामने आया। यह सब भी करोड़ों के इस खेल में शामिल थे। इनको वांछित मानते हुए पुलिस ने इनकी तलाश शुरू कर दी। कुल 17 वांछित सटोरियों में पुलिस सिर्फ भाजपा नेता आशीष उपाध्याय को ही पकड़ सकी, जबकि 16 लोग एक सप्ताह बाद भी उसके हाथ नहीं आ सके। वांछितों के बारे में पुलिस को कुछ भी पता नहीं चल सका है। एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति का दावा है कि वांछितों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। जल्द इनकी गिरफ्तारी होगी।
सटोरियों के खिलाफ स्वॉट भी ठंडी
सटोरियों के खिलाफ थानेवार अभियान चला, कई बड़े सटोरिये पकड़े गए लेकिन, स्वॉट की इनमें कोई भूमिका नजर नहीं आई। वांछित भाजपा नेता आशीष उपाध्याय का सुराग मिलने पर पुलिस टीम दिल्ली भेजी गई, उसमें भी स्वॉट प्रभारी विनय दिवाकर के बजाय चिरगांव थानाध्यक्ष राहुल राठौर की अगुवाई में टीम गई। उसकी गिरफ्तारी भी स्वॉट नहीं कर सकी। नए प्रभारी बनाए जाने के बाद से स्वॉट की ओर से कोई भी उल्लेखनीय सफलता अभी तक सामने नहीं आई।
कोर्ट में सरेंडर की फिराक में कई सट्टेबाज
पुलिस को चकमा देकर भाग निकले पप्पू यादव, पंकज राय समेत कई शातिर सट्टेबाजों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए प्रार्थना पत्र भी दिया है। इनके आत्मसमर्पण करने की रणनीति से पुलिस भी सतर्क हो गई है। पुलिस टीम भी कोर्ट के आसपास चौकसी बरत रही है।
ऑनलाइन से ऑफलाइन हो गए सटोरिये, नए सिम के सहारे शुरू हुआ खेल
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर पुलिस की सख्ती के बाद सटोरियों ने अपना नेटवर्क बदल लिया। लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अब महानगर में ऑफलाइन सट्टे का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि पहले मोबाइल एप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिये सट्टा संचालित करने वाले गिरोह अब ऑफलाइन सट्टा खिलवा रहे हैं। सट्टे का भाव अब एप के बजाय मोबाइल पर लग रहा है। इसके लिए नए सिम लिए गए हैं। इनके सहारे यह नया खेल शुरू हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि लाइव टीवी के सहारे तेज नेटवर्क की व्यवस्था भी बनाई गई है। खास तौर से इस कनेक्शन के लिए 3 से 5 हजार रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं, ताकि मैच की हर गेंद और अपडेट पर तुरंत रेट बदला जा सके। पुलिस की डिजिटल ट्रैकिंग से बचने के लिए सटोरिये 8 से 10 नए मोबाइल और अलग-अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं नंबरों के जरिये कॉल और मैसेज से सट्टा लग रहा है। सूत्रों के मुताबिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई के बाद सटोरियों ने अपना नेटवर्क छोटे-छोटे ग्रुप में बांट दिया है। अब बड़े ग्रुप या सार्वजनिक लिंक के बजाय भरोसेमंद ग्राहकों तक पहुंच बनाई जा रही है।