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इस साल 83 युवा एचआईवी का शिकार, 19 साल के युवक समेत 16 ने तोड़ा दम

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झांसी। कोरोना वायरस के चलते भले ही इस साल एचआईवी की जांचें कम हुई हों फिर भी 124 मरीज मिले हैं। खास बात ये है कि इनमें से 83 युवा हैं। यही नहीं, 17 वर्षीय नाबालिग भी इस भयानक बीमारी की चपेट में आ गया है। जबकि, 19 साल के युवक समेत 16 मरीजों की एचआईवी की वजह से जान भी चली गई है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में बाकी मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में हर साल औसतन 200 से अधिक एचआईवी के रोगी मिलते रहे हैं। इस बार कोरोना वायरस के चलते पहले लॉकडाउन लगा रहा। फिर पूरा फोकस कोरोना महामारी के इलाज में ही लग गया। ऐसे में एचआईवी रोगियों की जांच पहले की तरह नहीं हो सकी। इसके बावजूद एक दिसंबर 2019 से 30 नवंबर 2020 तक 124 नए रोगी एआरटी सेंटर में पंजीकृत हुए हैं। इसमें 83 एचआईवी संक्रमित 18 से 40 साल के बीच के हैं। 17 साल का हाईस्कूल का छात्र इस बीमारी से अछूता नहीं रहा है। वहीं, 19 साल के तीन और रोगी भी मिले हैं। इसमें एक इंजेक्शन, एक मां के जरिए एचआईवी संक्रमित हुआ है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि युवाओं में यह बीमारी तेजी से पांव पसार रही है।
रेड जोन में ये क्षेत्र
झांसी में एचआईवी के कई रेड जोन हैं, जहां गुच्छे में इस बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। रेड जोन में चित्रा चौराहा, सीपरी बाजार मलिन बस्ती, कांशीराम कॉलोनी, हसारी, आईटीआई आदि क्षेत्र शामिल हैं।
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इंजेक्शन से नशे की लत भी पड़ रही भारी
इंजेक्शन से नशे की लत भी एचआईवी महामारी का शिकार बना रही है। कोई भी एड्स रोगी जब इंजेक्शन से नशा करता है, फिर उसी इंजेक्शन की निडिल का इस्तेमाल जब कोई दूसरा व्यक्ति कर लेता है तो वह भी एचआईवी की चपेट में आ जाता है। एआरटी सेंटर में कई ऐसे रोगी भी पंजीकृत हैं, जिनमें सिरिंज के जरिए एचआईवी पहुंचा।
ऐसे करें पता
एआरटी सेंटर की स्टाफ नर्स श्वेता विल्सन ने बताया कि सिर्फ खून की जांच से ही एचआईवी का पता लगा सकते हैं। ये जांच जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में स्थित आईसीटीसी, पीपीटीसीटी केंद्र और ब्लड बैंक में मुफ्त उपलब्ध है।
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ये हैं आंकड़ा
कुल पंजीकृत: 2582
इलाज मिला: 2181
अभी दवा ले रहे: 869
अब तक हुई मौतें: 570
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