कमरों में कोचिंग, सड़क पर वाहन
झांसी। महानगर में व्यवसायिक कांप्लेक्स और बड़े कोचिंग सेंटरों के पास भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है।ग्राहकों और कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपने वाहन सड़क पर ही खड़े करने पड़ते हैं। इससे सड़क भी संकरी हो जाती हैं। हमेशा वहां पर हादसे होने की आशंका रहती है। इस ओर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जेडीए और नगर निगम के जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
शहर की प्रमुख सड़कों के किनारे कमरों और व्यावसायिक कांप्लेक्स में भी कोचिंग चल रही हैं। वहां पर छात्र-छात्राएं सड़क पर वाहन खड़े कर देते हैं। यही कारण है कि आएदिन जाम लग जाता है। इतना ही नहीं इन अवैध स्टैंडों के कारण अब तक कई हादसे भी हो चुके हैं। बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। मिशन गेट से ग्वालियर रोड, बीकेडी से आशिक चौराहा, सीपरी बाजार, न्यू रोड, सैंयर गेट रोड, झोकन बाग सहित शहर के अन्य स्थान और सड़क ऐसी हैं जहां दुकानों, व्यवसायिक कांप्लेक्स और कोचिंग आने वाले वाहनों को सड़क किनारे खड़ा किया जाता है।
पार्किंग नहीं, पंजीकरण नहीं
कोचिंग का पंजीकरण कराते समय नियम में शामिल है कि अन्य सुविधाओं के साथ-साथ ही पार्किंग होना अनिवार्य है। ताकि, कोचिंग आने वाले छात्र-छात्राएं एक ही स्थान पर वाहनों को पार्क कर सकें। हालांकि, कोचिंग के बाहर कई बार अभियान चलाकर चेतावनी दी गई लेकिन उसका असर नजर नहीं आ रहा है।
नियम दरकिनार कर चल रहे कांप्लेक्स
जेडीए के नियमानुसार व्यवसायिक कांप्लेक्स के निर्माण को तभी मंजूरी दी जाती है जब उसमें पार्किंग की व्यवस्था हो। मानचित्र में इसका बखूबी पालन कर पार्किंग तो दर्शायी जाती है पर सच्चाई यह है कि उसके स्थान पर दुकानें बनाकर तैयार कर दीं गईं। फिर भी जेडीए की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कोचिंग संचालकों का पंजीकरण करने से पूर्व अन्य सुविधाओं के साथ पार्किंग की सुविधा भी जांची जाती है। तब जाकर पंजीकरण होता है। अगर, कहीं पार्किंग की व्यवस्था नहीं है तो कार्रवाई होगी। - डॉ. संध्या रानी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी
कांप्लेक्स व कोचिंग सेंटरों के बाहर सड़कों पर वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही संचालकों को चेतावनी जारी की जाएगी। फिलहाल, अभियान लगातार चलाया जा रहा है। - आरके सिंह, यातायात प्रभारी