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जामनी बांध: 15 साल से गांवों में पानी की आपूर्ति बंद

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जामनी बांध: 15 साल से गांवों में पानी की आपूर्ति बंद
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ङोंगरा खुर्द। कभी मड़ावरा और महरौनी ब्लॉक के गांवों की जीवन रेखा रहा जामनी बांध अब इन गांवों में पानी सप्लाई नहीं दे पा रहा है। इस कारण गांवों के लोगों को प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। यह स्थिति आज से नहीं, बल्कि पंद्रह साल से बनी हुई है। बांध में सिल्ट जमा हो गई है और पाइप लाइन जर्जर हो गई है। इससे बार-बार लीकेज होने के कारण पानी की सप्लाई ही ठप कर दी गई है।
मड़ावरा ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 10 किमी की दूरी पर जामनी नदी पर 1973 में बांध बनाया गया। जामनी बांध बनने से क्षेत्र के किसानों की किस्मत खुल गई थी। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने लगा व आसपास के गांवों में पीने के पानी की समस्या हल हो गई। लेकिन, धीरे-धीरे सिल्ट जमा होती चली गई। इसका असर बांध की जल धारण क्षमता पर पड़ा। यही कारण है कि पिछले वर्षों तक जहां बांध में पर्याप्त पानी रहता था, अब वहीं इस वर्ष पानी का स्तर बहुत कम हो गया है। बांध के मुख्य गेट के आसपास कुछ दूरी तक ही पानी दिख रहा है, बाकी बांध में चारों ओर का पानी समाप्त हो गया है। जामनी बांध में सिल्ट जमा हो जाने से दिनों दिन घट रहा जलस्तर चिंता का विषय है। सिल्ट जमने से बांध जल्दी भर जाता है व जल्दी खाली हो जाता है। आने वाले दिनों में किसानों के लिए सिंचाई कार्य पर असर पड़ेगा। बांध में पानी की क्षमता 1324 फीट (403,55 मीटर) है।
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बांध भरने का असर आसपास के कुओं के जलस्तर पर भी पड़ रहा है। पहले के समय में गांवों में कुओं की स्थिति अच्छी रहती थी, जिसके कारण हैंडपंप भी नहीं सूखते थे। लेकिन, अब कुओं के साथ- साथ गर्मी के दिनों में अधिकतर हैंडपंपों का जलस्तर घट जाता है। भीषण गर्मी में कई गांवों में हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है, हैंडपंपों से पानी नहीं निकलने से लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। हर वर्ष पानी की किल्लत गर्मी के दिनों में बढ़ जाती है, लेकिन इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
चुनौती बनी जल भंडारण क्षमता
जामनी बांध की जल भंडारण क्षमता आसपास के किसानों के लिए चुनौती साबित हो रही है, क्योंकि किसान सिंचाई के लिए बांध के पानी पर निर्भर हैं। यदि बरसात ठीक हो गई और बांध में पर्याप्त पानी आ गया तो ठीक, अन्यथा सिंचाई के लिए किसानों को कोई दूसरा सहारा नहीं है। कई सालों के बाद पहली बार इस वर्ष दो महीने तक नहरों का संचालन हुआ, जबकि बांध बनने की शुरूआत में तीन महीने तक नहरों का संचालन होता था। जब गांवों में पानी की आपूर्ति होती थी, तो बांध में आठ फिट पानी रोका जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। पूर्व में ग्राम कुम्हैड़ी में लगने वाले अंजनी माता मेला में जामनी बांध से पानी की सप्लाई होती थी, जानवरों के लिए पीने का पानी, मेला में आने वालों के लिए नहाने धोने के लिए पानी इसी बांध से आता था, पर अब ऐसा बहुत कम हो पाता है।
बांध खाली होता है तो किसान करते हैं खेती
जामनी बांध से लगभग 11,270 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होती है। बांध के भीतर 2700 हेक्टेयर जमीन बांध के डूब क्षेत्र में आती है। यहां पर जलस्तर कम हो जाने के बाद किसान खरबूज, तरबूज, मूंग, चना, सब्जी आदि की फसल पैदा करते हैं। इससे किसानों को भी फायदा होता है, क्योंकि खाद की जरूरत नहीं पड़ती और पानी पर्याप्त रहता है। बांध की पिचन के सौ फीट दूर खेती करनी चाहिए, लेकिन किसान पिचन के किनारे से ही जमीन का उपयोग कर रहे हैं, इससे बांध के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
इन गांवों में होती थी पानी की सप्लाई
जामनी बांध से ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की सप्लाई होती थी। इसमें ग्राम बहादुरपुर, सैदपुर, सतवांसा, देवरान, मड़ावरा, साढ़ूूमल, गढ़ोली, कुम्हैड़ी, बानपुर समेत आसपास के कई गांव शामिल हैं। लेकिन, अब पानी की सप्लाई बंद है। पाइप लाइन में लीकेज और पुरानी लाइन होने के कारण सप्लाई बंद कर दी गई, लेकिन इसे ठीक करने की ओर ध्यान नहीं दिया गया। अब किसी गांव में ट्यूबवेल से पानी सप्लाई हो रही है तो किसी गांव में हैंडपंप का सहारा है। गांवों में पानी की टंकिंया बनी हैं, लेकिन सिर्फ नाम के लिए हैं। यानि, बांध में जमा सिल्ट का असर हजारों लोगों की पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है।

जामनी बांध के ङूब क्षेत्र की जमीन में पांच साल के लिए सिंचाई विभाग द्वारा पट्टे आवंटित किए जाते हैं। वह मिट्टी पहले ही बरसात में पानी के साथ सिल्ट के रूप में जमा हो जाती है। अगर बांध के भीतर खेती न की जाए तो मिट्टी काफी हद तक जमा नहीं होगी।
- दीपक दुबे, किसान
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जामनी बांध के डूब क्षेत्र सीमा के अंदर बंधी का निर्माण हो, जिससे सिल्ट बाहर रह जाएगी। नदी और नालों में चेकडैम बनाए जाएं। पहले नहरें सिंचाई के लिए 90 दिन चलती थीं, लेकिन बांध का जलस्तर कम होने से 60- 70 दिन बड़ी मुश्किल से चल पा रही हैं।
- बब्बू साव, किसान
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जामनी बांध से सिंचाई एवं कुम्हैड़ी मेला के लिए ही पानी मुहैया कराया जाता है। बांध से पेयजल के लिए पानी नहीं दिया जाता है। हालांकि, सजनाम बांध से डोंगराकलां ग्राम समूह पेयजल के लिए पानी दिया जा रहा है।
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- शरद कुमार, अधिशासी अभियंता
सिंचाई खंड
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जामनी बांध में सिंचाई एवं मेला के लिए पानी रोका जाता है। मेला को पानी पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। बांध की सिल्ट सफाई का प्रस्ताव बनाने पर विचार किया जा रहा है।
- हरीराम
अवर अभियंता, सिंचाई खंड
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