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निजी स्कूलों व शिक्षकों को आर्थिक सहायता दे सरकार

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निजी स्कूलों व शिक्षकों को आर्थिक सहायता दे सरकार
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झांसी। शासन की मंशा है कि सूबे के निजी माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों को मासिक वेतन 15000 हजार मिले और उनकी नौकरी की पूरी सुरक्षा हो। इस पर निजी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि सरकार की योजना तो ठीक है, लेकिन विद्यालय प्रबंध समिति पर दबाव डालने से कई विद्यालय बंद हो सकते हैं और लोग बेरोजगार हो सकते हैं। सरकार स्वयं आर्थिक सहयोग करे, तब ही योजना परवान चढ़ पाएगी।
इन दिनों शासन स्तर पर सेवा नियमावली के लिए माध्यमिक शिक्षा एक्ट में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। इससे निजी स्कूल में पढ़ा रहे शिक्षकों को 15 हजार रुपये विद्यालय द्वारा देने होंगे। साथ ही वह पूर्णकालिक शिक्षक भी कहलाएंगे। जब चाहे उन्हें नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा। इस पर निजी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि अधिकांश स्कूलों के पास आय के स्त्रोत कम होते हैं। ऐसे में वह प्रत्येक शिक्षक को 15-15 हजार रुपये देना मुमकिन नहीं होगा। दबाव की स्थिति में कई विद्यालय बंद हो जाएंगे और जिन्हें थोड़ा बहुत रोजगार प्राप्त है। उससे वह भी वंचित हो जाएंगे। आवश्यकता है कि सरकार पूर्व की तरह निजी स्कूलों के शिक्षकों को मानदेय दे अथवा निजी स्कूल को आर्थिक सहायता मुहैया कराए। आज प्राइवेट स्कूल के विद्यार्थी ही प्रदेश की टॉपर सूची में अव्वल है। सरकारी स्कूलों का योगदान नगण्य बना है। इधर, निजी माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक को 15 हजार रुपये वेतन देने और उनकी सेवा नियमावली के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. नीरज कुमार पांडेय ने कहा कि अभी उनके पास कोई शासनादेश नहीं आया हैं। आते ही पालन होगा।
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वर्ष 2016 में यह मानदेय दिया जाता था
शासन ने वर्ष 2016 में जनपद के निजी स्कूलों में पढ़ा रहे 1300 शिक्षकों को मानदेय देना शुरू किया था। इसमें हाईस्कूल के शिक्षक को लगभग 975 रुपये और इंटर के शिक्षक को 1100 रुपये दिए गए थे लेकिन यह योजना करीब एक साल चली और शासन के बदलने के बाद बंद हो गई।
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अधिकतर निजी स्कूलों के विद्यार्थी होते टॉपर
हर साल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के रिजल्ट में प्राइवेट स्कूलों के ही विद्यार्थी टॉपर बनते हैं। इस साल भी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के टॉप टेन में निजी स्कूल के विद्यार्थी अव्वल रहे, जबकि सरकारी व अनुदानित स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थी बमुश्किल ही जगह बना सके। जनपद में 130 माध्यमिक निजी स्कूल हैं, जिनमें 3000 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। विशेष बात यह है कि शासन ने अक्तूबर 1984 से अनुदानित स्कूल को लेकर रोक लगा रखी है। ऐसे में जिले में कोई भी निजी स्कूल अनुदानित नहीं हो सका है।
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