नौ दिन में एक लाख मीट्रिक टन गेहूं की दरकार
झांसी। गेहूं की सरकारी खरीद अब सिर्फ नौ दिन और होनी है, लेकिन मंडल में खरीद का लक्ष्य पहाड़ जैसी चुनौती बना हुआ है। लक्ष्य हासिल करने के लिए एक लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की दरकार है। लेकिन, हालात इतर हैं। खरीद केंद्रों पर सन्नाटे की स्थिति है।
पिछले साल मानसून ने बुंदेलखंड का खूब साथ दिया था। पांच साल बाद हुई सामान्य बारिश की बदौलत बीते रबी सीजन में मंडल में गेहूं की अच्छी पैदावार हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने मंडल में गेहूं खरीद का लक्ष्य दो लाख अठानवे हजार मीट्रिक टन का दिया था। इसमें झांसी जिले में अड़सठ हजार एक सौ बाइस, जालौन में इकसठ हजार नौ सौ छियालिस और ललितपुर में इकसठ हजार आठ सौ उनतीस मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाना था। खरीद एक अप्रैल से शुरू होकर पंद्रह जून तक की जानी है। सिर्फ नौ दिन ही बाकी हैं। लेकिन, लक्ष्य अभी भी कोसों दूर बना हुआ है। अब तक मंडल में एक लाख सत्तानवे हजार तीन सौ तेरह मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है। लक्ष्य हासिल करने के लिए एक लाख छह सौ सतासी मीट्रिक टन गेहूं की और दरकार है। लेकिन, वर्तमान परिस्थितियों में लक्ष्य प्राप्त होता नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि, ज्यादातर खरीद केंद्रों पर सन्नाटे की स्थिति है। इक्का - दुक्का किसान ही केंद्रों नजर आ रहे हैं।
बड़े किसानों ने उपज दबाई
जानकारों के अनुसार इस साल मंडल में गेहूं की बंपर पैदावार हुई है। ऐसे में लक्ष्य के मुताबिक खरीद कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन, बड़े किसानों ने अपनी उपज दबा ली है। पिछले साल सरकारी खरीद के बाद बाजार में गेहूं के दामों में बढ़ोत्तरी हुई थी। ऐसे में तमाम किसान अनुमान लगाए बैठे हैं कि पिछले बार की तरह इस साल कीमत बढ़ने पर वे ज्यादा मुनाफा ले सकेंगे। उल्लेखनीय है कि सरकारी खरीद 1840 प्रति क्विंटल की दर से हो रही है। इसके अलावा किसानों को ढुलाई का बीस रुपये अतिरिक्त दिया जा रहा है। ये राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जा रही है।
गेहूं की सरकारी खरीद पंद्रह जून तक जारी है। किसानों को उनकी उपज का 72 घंटे के भीतर भुगतान किया जा रहा है। बड़े किसानों से संपर्क कर उन्हें बिक्री के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बाद में कीमत न बढ़ने पर उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
- नरेंद्र कुमार, संभागीय खाद्य नियंत्रक