दो साल में हो गए दोगुने कुष्ठ रोगी
ललितपुर। जिले में कुष्ठ रोगियों की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है। दो साल में मरीजों संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे विभाग द्वारा चलाए जा रहे कुष्ठ उन्मूलन अभियान की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुष्ठ रोगियों के चिह्नींकरण के लिए अभियान चलाया जाता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ के संभावित रोगियों की खोज जांच कर उपचार की सुविधा मुहैया कराई जाती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी, आशा बहू व स्वयंसेवी संस्था का सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर कुष्ठ रोग के लक्षणों की जानकारी देते हैं। लोगों में संभावित लक्षणों की पहचान करते हैं, जिसमें कुष्ठ रोग के संभावित मरीजों को चिह्नित कर आसपास के सीएचसी व पीएचसी में जांच करने की सलाह दी जाती है, साथ ही संभावित मरीजों की जांच कराई जाती है।
जांच में रोग की पुष्टि होने पर दवाइयां उपलब्ध करा कर उपचार की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही नगर क्षेत्र में जिला अस्पताल, नेहरुनगर और गोविंदनगर में खुले अरबन हेल्थ पोस्ट में आने वाले मरीजों में कुष्ट के लक्षण पाए जाने पर जांच कर पुष्टि होने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में खुले कुष्ट कार्यालय से दवा उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद भी कुष्ठ रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते वित्तीय वर्ष 2017-18 में कुष्ठ के 88 रोगी चिह्नित किए गए। इसमें प्रारंभिक अवस्था के कुष्ठ रोगियों की संख्या 28 रही थी। संक्रामक कुष्ठ (एमबी) रोगियों की संख्या 60 थी। वर्ष 2018- 19 में 124 कुष्ठ के रोगी चिह्नित किए गए। इनमें प्रारंभिक अवस्था के कुष्ठ रोगियों की संख्या 35 हो गई और संक्रामक कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़कर 89 हो गई। जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 70 प्रतिशत अधिक हो गई है।
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दो प्रकार का होता है कुष्ठ रोग
प्रारंभिक अवस्था में कुष्ठ रोग असंक्रामक होता है, जिसे पासी बैसीलेसरी (पीबी) कहते है। पीबी रोगी से दूसरे में यह रोग नहीं फैलता है। इस प्रकार का मरीज छह माह की दवा लेकर स्वस्थ हो सकता है। इलाज निशुल्क किया जाता है। यदि रोगी बीच में दवा छोड़ देता है, तो वह (एमबी) संक्रामक रोगी हो जाता है। जिसे एक वर्ष प्रतिदिन दवा लेनी होती है। एमबी मरीजों के छीकनें या खांसने से यह रोग दूसरे व्यक्ति को हो जाता है। एमबी मरीज के खांसने या छींकने से कुष्ठ वैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति में चला जाता है, जो उसके शरीर को दो वर्ष बाद प्रभावित करता है। दो वर्ष बाद व्यक्ति के शरीर पर तॉबे जैसा धब्बा दिखाई देता है।
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कर्मचारियों की भारी कमी
कुष्ठ रोग विभाग में 15 वर्करों के पद स्वीकृत है, जिसके सापेक्ष एक पद पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं। सुपरवाइजर के चार पद स्वीकृत हैं, जिसमें केवल एक कार्यरत हैं। एक स्वास्थ्य शिक्षक का पद भी रिक्त पड़ा है। जिससे विभाग की कार्यप्रणाली की स्थिति स्पष्ट नजर आ रही है।
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कर्मचारियों की कमी के कारण आशा बहू व आंगनबाड़ी कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। कर्मचारियों की कमी को लेकर शासन को पत्राचार किया गया है। कर्मचारी मिलते ही नियुक्त किए जाएंगे।
- आर के सोनी
जिला क्षय रोग अधिकारी