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युवओ ने काटा हंगामा, पुलिस ने खदेडा-City

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सत्ता मद और ‘खाकी’ के कद में टकराव
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बबीना में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने किया हंगामा, पुलिस ने खदेड़ा
सिपाहियों से हुई अभद्रता, आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सके थानेदार
अमर उजाला ब्यूरो
बबीना। मंगलवार रात सत्ता के मद में चूर खुद को भारतीय जनता युवा मोर्चा का नेता बताने वालों ने कस्बा के मुख्य तिराहे पर जमकर बवाल मचाया। पुलिस उन्हें रोकने गई तो वह अभद्रता करने लगे। हालांकि लाठियां बजाकर उन्हें खदेड़ दिया गया, लेकिन थानेदार उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सके।
कस्बा के मुख्य तिराहे का नजारा मंगलवार रात आम दिनों की तरह ही था। करीब साढ़े आठ बजे कुछ कारें तिराहे पर आकर रुके और आड़ी-तिरछी खड़ी हो गईं। कारों से उतरकर कुछ युवा बाहर आ गए और आने-जाने वालों से अभद्रता करने लगे। इस दौरान सभी कारों में फिर सवार हो गए और सड़क पर वाहनों को गोल-गोल घुमाने लगे। इसी दौरान वहां गश्त पर पहुंची पुलिस ने कारों को रोकने का प्रयास किया तो एक कार सवार रुक कर खुद को भारतीय जनता युवा मोर्चा का नेता बताकर उसे जाने को कहा। सिपाही ने जानकारी थानाध्यक्ष आलोक सक्सेना को दी तो उन्होंने मौके पर और फोर्स भेजकर हंगामा कर रहे युवाओं को रोकने का प्रयास किया। इस पर युवाओं और पुलिस के सिपाहियों के बीच पहले बहस होने लगी।
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मौके पर पुलिस बल बढ़ता देख युवा भड़क गए और पुलिस के साथ अभद्रता करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो एक लड़के ने एक सिपाही की कॉलर तक पकड़ ली थी। इस पर गुस्साए सिपाहियों ने लाठियां बजाकर सभी को खदेड़ दिया। इस दौरान करीब आधे घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

एफआईआर पर बोलने से बच रहे एसओ
सरेराह हुए बवाल के बाद भी पुलिस मामला दर्ज नहीं कर सकी। इतना ही नहीं एसओ आलोक सक्सेना तो एफआईआर दर्ज करने के सवाल से भी बचते नजर आ रहे हैं। अमर उजाला संवाददाता ने इस बारे में जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिशें दी जा रही हैं। कार्रवाई होगी, लेकिन कब यह नहीं बता सकते।

पुलिस ने की अभद्रता
युवा मोर्चा के कार्यकर्ता तिराहे के पास शांतिपूर्वक बैठे थे। पुलिस वालों ने आकर उनके साथ अभद्रता की थी। पुलिस का आचरण आम नागरिकों के साथ अच्छा नहीं है।
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सोनू सिकरवार, नगर अध्यक्ष भारतीय जनता युवा मोर्चा

काली फिल्म चढ़ी कारें दौड़ रहीं
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी कस्बे की सड़कों पर दिनभर काली फिल्म चढ़ी कारें दौड़ती दिखाई देती हैं। इन कारों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के झंडे और पदनाम पट्टिकाएं भी लगी नजर आती हैं। पुलिस इन पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर सकी है।
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