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ग्राम मनकपुरा में बिजली नहीं

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22 मोंठ फोटो पीएच 1,2,3 एवं 4 कैप्सन- ग्राम मनकपुरा में बिजली नहीं।
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::::: ग्राउंड रिपोर्ट

आज भी लालटेन से रोशन होती हैं मनकपुरा की रातें
- गांव में नहीं आ सकी बिजली, जनप्रतिनिधियों ने वोट लेने के बाद कभी मुड़कर नहीं देखा
- लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक का निर्णय ले चुके हैं ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
मोंठ।
ब्लॉक के मनकपुरा गांव की रातें आज भी लालटेन की रोशनी से रोशन होती हैं। आजादी के कई दशक बीतने के बाद भी गांव में बिजली नहीं आ सकी। इसे लेकर ग्रामीण कई बार लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक का निर्णय ले चुके हैं, लेकिन हमेशा उन्हें फुसलाकर मतदान तो कराया लिया गया, पर वादे के मुताबिक उन्हें बिजली किसी भी जनप्रतिनिधि ने दिलाने की कोशिश नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए अब बिजली एक सपने की तरह है।
मनकपुरा की आबादी छह सौ के करीब है। तीस-चालीस परिवार यहां रहते हैं, जिनमें 250 से अधिक मतदाता हैं। शाम सात बजे के बाद गांव में सन्नाटा छा जाता है। ग्रामीण शाम ढलने से पहले दिनचर्या में शामिल कार्यों को पूरा कर लेते हैं। आसपास के लगभग सभी ग्रामों में कई सालों से बिजली की सुविधा है, केवल मनकपुरा को ही वंचित रखा गया है। गांव वालों का आरोप है कि मनकपुरा के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कई बार विधानसभा एवं लोकसभा के चुनाव में मतदान बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया, लेकिन समझाने-बुझाने के बाद गांव वालों ने मतदान में हिस्सा तो ले लिया, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने अपने वादे नहीं निभाए। आज हालात यह हैं कि गांव के बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। हम गर्मी के मौसम में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। नीम के पत्तों का धुआं रखकर मच्छरों से बचाव करते हैं। गांव के नारायण सिंह, टीकाराम, लक्ष्मण सिंह, नीरज, मानवेंद्र, सुनील, साहब सिंह, संतोष एवं महेश का कहना है कि गांव के लोग शाम को पांच से छह बजे के बीच में सभी कामकाज कर खाना खा लेते हैं और शाम ढलने से पहले चारपाइयों पर पहुंच जाते हैं। रात गहराते ही जंगली जानवर और कीड़े-मकोड़ों का डर बना रहता है। गांव में काफी संख्या में काले बिच्छू हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से करीब दो किलोमीटर दूर ग्राम सौजना में करीब 17 वर्ष पहले विद्युतीकरण हो गया था। मनकपुरा के लोगों को बिजली की सुविधा से वंचित रखा गया है। उन्होंने दक्षिणांचल विद्युत विभाग के एमडी से भी इस संबंध में पत्राचार किए, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल पाया।
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तोड़ दी आस
गांव के 85 साल के बुजुर्ग पंचू का कहना है कि उन्होंने बिजली की आस ही तोड़ दी है। मिट्टी का तेल रोशनी के लिए जलाना पड़ता है। एक परमट पर मात्र दो लीटर तेल दिया जाता है, जो एक हफ्ते के अंदर खत्म हो जाता है। बिजली के अभाव में खेती भी खाली पड़ी रहती है। समय पर सिंचाई की व्यवस्था न होने से सैकड़ों एकड़ खेती की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बरसात के अलावा नदी एवं नहर के पानी पर ही खेती निर्भर है।
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बैटरी से चार्ज करते हैं मोबाइल
गांव के लोग ट्रैक्टर की बैटरी से मोबाइल चार्ज करते हैं। गांव के पूर्व प्रधान भरत सिंह के यहां सौर ऊर्जा की प्लेट लगी है। टेलीविजन सेट भी है। उनका कहना है कि ट्रैक्टर की बैटरी से टेलीविजन चलता है। सौर ऊर्जा की लाइट से गांव में कुछ देर तक उजाला करने की कोशिश की जाती है। ग्रामवासियों के मोबाइल फोन भी पूर्व प्रधान के यहां चार्ज किए जाते हैं।
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रात में नहीं हो पाती पढ़ाई
गांव में सरकारी स्कूल है। कक्षा चार में पढ़ रहे 8 वर्षीय कोमल का कहना है कि वह दिन में पढ़ाई कर लेता है। रात में नहीं पढ़ पाता। बता दें कि ग्राम का एक भी व्यक्ति सरकारी नौकरी में नहीं है। सिर्फ एक व्यक्ति ही कला स्नातक उत्तीर्ण है।
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पावर फॉर ऑल योजना में शामिल है गांव
अधीक्षण अभियंता वितरण झांसी मंडल झांसी संदीप अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री की हर घर को बिजली उपलब्ध कराने वाली पावर फॉर ऑल योजना में इस गांव को शामिल किया गया है। टेक्निकल विट करा दी गई है। राजस्व विट के लिए भेजा गया है। एक कंपनी के पक्ष में टेंडर भी हो गया है। जल्द ही गांव को रोशन किया जाएगा। हालांकि, अधीक्षण अभियंता इस बात का कोई खास जवाब नहीं दे पाए कि आजादी के बाद से अभी तक मनकपुरा गांव में बिजली क्यों नहीं पहुंची? वह खुद भी हैरत में हैं कि आखिर विद्युतीकरण योजना में गांव कैसे और क्यों छूट गया।
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कई बार की फरियाद
ग्राम प्रधान करन सिंह पटेल का कहना है कि बिजली के लिए कई बार तहसील दिवस के अलावा जिले के नोडल प्रमुख सचिव, सांसद, विधायक तथा विद्युत विभाग के आला अधिकारियों को भी बताया गया। लेकिन, अभी तक गांव में बिजली नहीं आ सकी।
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