‘झुलसा’ रही धूप, फंगल इंफेक्शन भी फैला
झांसी। दिनों दिन बढ़ती धूप की तपिश लोगों को त्वचा रोगी भी बना रही है। एक तरफ जहां लोग सन बर्न (धूप में त्वचा का झुलस जाना) का शिकार हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फंगल इंफेक्शन भी तेजी से फैल रहा है। बीते आठ-दस दिनों में मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सरकारी और निजी अस्पताल दोनों जगहों पर त्वचा रोगियों की भीड़ उमड़ रही है।
इस गर्मी में अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। बुधवार को भी पारा 46 डिग्री सेल्सियस रहा। भीषण़ गर्मी में लोग पसीना-पसीना होने लगे हैं। इससे बीमारियां फैल रही हैं। चर्म रोग विशेषज्ञ के अनुसार गर्मी के कारण शरीर के कई हिस्सों में पसीना जमा होने लगता है। उन हिस्सों में सीलन के कारण बैक्टीरिया (एसपरिगिलोसिस) पैदा हो जाते हैं जो फंगल इंफेक्शन का कारण बनते हैं। इससे शरीर में खुजली शुरू हो जाती है। यहां लाल चकत्ते व दाने निकलने लगते हैं। सामान्य तौर पर यह जानलेवा नहीं होते हैं लेकिन समय से उपचार नहीं होने पर यह तेजी से फैलते हैं। प्रभावित जगह की त्वचा को नष्ट कर देते हैं, जिससे चोट लगने पर यहां घाव हो जाता है, जो ठीक नहीं होता है। यह घाव बाद में नासूर बन जाते हैं, जो ठीक नहीं होने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। फंगल इंफेक्शन के और भी कई कारण होते हैं। व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता कम होने पर भी इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। मधुमेह पीड़ितों में इस इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं, सूरज की तेज तपिश से लोग सन बर्न (धूप में त्वचा का झुलस जाना) का शिकार हो रहे हैं। सन बर्न उन्हीं लोगों को होता है, जो लंबे समय तक धूप में बने रहते हैं। ज्यादातर किसानों को यह बीमारी घेरती है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का ओपीडी हो या फिर निजी नर्सिंग होम का, हर जगह इन दिनों फंगल इंफेक्शन और सन बर्न के मरीजों में 20 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। डॉक्टर भी लोगों को धूप व पसीने से बचाव करने और सूती कपड़े पहनने की सलाह दे रहे हैं।
सन बर्न में ये होता
- हाथ, पीठ, चेहरे पर छोटे दाने आने लगते
- त्वचा काली पड़ने लगती
- खुजली, जलन शुरू हो जाती
ये ध्यान दें
- रोज नहाएं और नमी को पूरी तरह पोछें
- कभी भी गीले कपड़े न पहनें
- साबुन, तौलिया, कपड़ों को साझा न करें
- सूती और ढीले कपड़े पहनें
- धुले कपड़ों को सूरज की रोशनी में सुखाएं
फंगल इंफेक्शन के 50 से 60 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। एक साथ दो-तीन दवाएं चलानी पड़ रही हैं। लोग शुरू में बिना चिकित्सक को दिखाए मेडिकल स्टोर से ट्यूब लेकर लगाते रहते हैं, इससे मर्ज काफी बढ़ जाता है। ऐसे में चार-पांच महीने दवाएं चलाने के बाद ये ठीक हो पाता है। ये इंफेक्शन नायलॉन, गीले, टाइट व सिंथेटिक के कपड़े पहनने की वजह से भी फैल रहा है। ज्यादा देर तक धूप में रहने से लोग सन बर्न का शिकार हो रहे हैं। ये 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पहुंचने पर होने लगता है। - डॉ. प्रतीक शिवहरे, त्वचा रोग विशेषज्ञ।